यहां कमलनाथ के 3 मंत्री और 4 MLA भी नही दिला पाए कांग्रेस को जीत, फिर मिली करारी हार

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खरगोन।

एमपी में विधानसभा में सत्ता से बाहर हुई बीजेपी ने लोकसभा में शानदार एंट्री कर सबकों चौंका दिया है। खास करके उन सीटों पर जहां विधानसभा में कांग्रेस ने ना सिर्फ बेहतर प्रदर्शन किया था बल्कि वहां से चुनकर पहुंचे विधायक कमलनाथ कैबिनेट में शामिल होकर मंत्री भी बने, बावजूद इसके मंत्री-विधायक पार्टी को जीत दिलाने में नाकामयाब हुए।इनमें एक खरगोन लोकसभा सीट भी शामिल है, जहां सबसे पहले नतीजे घोषित किए गए। यहां बीजेपी के गजेन्द्र पटेल ने कांग्रेस के गोविंद मुजाल्दा को करीब दो लाख से अधिक वोटों से हराया। जबकी यहां से कांग्रेस के तीन मंत्री और 4 विधायक है, बावजूद इसके मुजाल्दा की हार नही रोक पाए और मोदी की आंधी में उड़ गए।

दरअसल, अंतिम चरण की वोटिंग से पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मालवा निमाड़ में मंत्रियों को जीत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि पार्टी को विधानसभा चुनाव की तरह प्रदर्शन करना है। मंत्री जीतू पटवारी, मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, तुलसी सिवालट, सुरेंद्र सिंह बघेल, उमंग सिंघार, बाला बच्चन, सचिन यादव और विजयलक्ष्मी साधो को यहां भेजा गया था,जिसमें बाला बच्चन, सचिन यादव और विजयलक्ष्मी साधो को खरगोन की जिम्मेदारी दी गई थी, बावजूग इसके तीनों मंत्री यहा जीत नही दिला पाए।जबकी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने भी यहां सभाएं की थी और बीजेपी के खिलाफ किसानों की नाराजगी और एंटीइनकमबेंसी बड़ा मुद्दा रही।

खास बात तो ये है कि विधानसभा में यहां कांग्रेस को शानदार जीत मिली थी और छह सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकी बीजेपी को तीन सीट का नुकसान हुआ था और केवल एक सीट ही हाथ आई थी।वैसे विधानसभा चुनाव में संसदीय क्षेत्र की सात सीटें जिसमें खरगोन, कसरावद, महेश्वर, राजपुर, पानसेमल, सेंधवा तथा भगवानपुरा (निर्दलीय) कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद बाला बच्चन, सचिन यादव और डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ को कमलनाथ सरकार में मंत्री बनाया गया। चुनाव में सभी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। सीएम कमलनाथ ने लोकसभा चुनाव में जीत की जिम्मेदारी मंत्रियों को सौंपी थी।साथ ही धमकी भी दी थी कि अगर कांग्रेस यहां से हारी तो मंत्री पद पर फिर से विचार किया जा सकता है, इसके बावजूद तीनों मंत्री मिलकर खरगोन में कांग्रेस को हार से नहीं बचा पाए। छह महीने बाद आए लोकसभा चुनाव में सियासी बाजी पूरी तरह पटल गई और आठों विधानसभा में भाजपा ने जीत हासिल की।

लोकसभा चुनाव के जो परिणाम सामने आए हैं, उसमें भाजपा हर मोर्चे पर आगे रही। पार्टी प्रत्याशी गजेंद्र पटेल को सबसे बड़ी जीत बड़वानी विधानसभा में मिली। यहां गजेंद्र 45016 वोटों की भारी बढ़त प्राप्त हुई। वैसे तो बीजेपी ने आठों विधानसभा में जीत दर्ज की। लेकिन सेंधवा में कांटे का मुकाबला हुआ। सबसे कम अंतर की जीत हुई। सेंधवा में भाजपा को मात्र 1300 वोटों की लीड मिली।बावजूद इसके पटेल ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।