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रतलाम के मां महालक्ष्मी मंदिर में शुरू हुआ दिवाली उत्सव, देश का इकलौता मंदिर जहां भक्तों द्वारा हीरे, जवाहरात और नोटों से की जाती है सजावट

Written by:Rishabh Namdev
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आज से रतलाम के मां महालक्ष्मी मंदिर में धूमधाम से दिवाली का पर्व शुरू हो चुका है। बता दें कि यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भक्तों द्वारा हीरे, जवाहरात और नोटों से मंदिर को सजाया जाता है। इस बार मंदिर की सजावट में 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी का इस्तेमाल किया गया है।
रतलाम के मां महालक्ष्मी मंदिर में शुरू हुआ दिवाली उत्सव, देश का इकलौता मंदिर जहां भक्तों द्वारा हीरे, जवाहरात और नोटों से की जाती है सजावट

रतलाम वासियों को दिवाली का बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि दिवाली के पहले दिन यानी धनतेरस से मां महालक्ष्मी का मंदिर सजाया जाता है। हीरे, जवाहरात और नोटों से भक्तों द्वारा मां के मंदिर को सजाया जाता है। मंदिर के हर छोर पर नोट नजर आते हैं। ₹10 से लेकर ₹500 तक के नोट मंदिर में सजावट के तौर पर इस्तेमाल किए गए हैं। इस साल 2 करोड़ रुपए से मंदिर को सजाया गया है। भक्तों ने इस अद्भुत सजावट के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है।

जानकारी दे दें कि जिन चीजों को सजावट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें दिवाली के पांच दिन के दीपोत्सव के बाद प्रसादी के रूप में भक्तों को वापस लौटा दिया जाएगा। यह काम मंदिर समिति द्वारा किया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे आज भी उसी प्रकार निभाया जा रहा है।

भक्तों द्वारा अर्पित नोटों और आभूषणों से सजाया जाता है

अब तक मंदिर का इतिहास रहा है कि जो भी धन, पैसा या नगदी मंदिर की सजावट में इस्तेमाल हुआ है, वह आज तक इधर से उधर नहीं हुआ है। न सिर्फ रतलामवासी बल्कि देशभर के अन्य क्षेत्रों से भी भक्त बड़ी संख्या में मां महालक्ष्मी मंदिर पहुंचते हैं और इसमें शामिल होते हैं। आज धनतेरस से भक्तों द्वारा मंदिर की सजावट को देखा जा सकता है। यह देश का पहला ऐसा मंदिर है जो 5 दिनों तक सिर्फ भक्तों द्वारा अर्पित नोटों और आभूषणों से सजाया जाता है। दिवाली के नजदीक आते ही मंदिर में भीड़ बढ़ने लगती है। दिवाली के 5 दिन के उत्सव में मंदिर में लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करते हैं और इस अद्भुत सजावट को निहारते हैं।

जानिए इस परंपरा का इतिहास

यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर की स्थापना रतलाम के महाराजा रतन सिंह राठौड़ ने की थी। उस दौरान इस मंदिर में धूमधाम से दीपावली मनाई गई थी। राजा वैभव, निरोगी काया और प्रजा की खुशहाली के लिए 5 दिन तक अपनी संपदा मंदिर में रखकर अपनी प्रजा के लिए आशीर्वाद मांगते थे और आराधना करते थे। दर्शन के दौरान राजा अपने शाही खजाने से सोने-चांदी के आभूषण मंगवाते थे और मां महालक्ष्मी के श्रृंगार के लिए अर्पित करते थे। इसके बाद से ही रतलाम में यह परंपरा शुरू हो गई। हालांकि इसमें कुछ बदलाव आए हैं। अब भक्त खुद मंदिर में अपने धन से सजावट करते हैं। धीरे-धीरे भक्तों की संख्या बढ़ने लगी। अब मंदिर में नोट और आभूषणों से अद्भुत सजावट की जाती है। हालांकि इस सजावट पर प्रशासन द्वारा भी पूरी निगरानी रखी जाती है।

बता दें कि रतलाम के मां महालक्ष्मी मंदिर की कई खासियतें हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में दूसरों की मूर्तियों के साथ ही गणेश जी व सरस्वती मां की मूर्तियां भी हैं। मां लक्ष्मी अपने हाथ में धन की थैली रखे हुए हैं। इसके साथ ही इस मंदिर में मां महालक्ष्मी अपने आठ रूपों में विराजमान हैं, जिसके चलते मंदिर की मान्यता और भी अधिक है और बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने मंदिर पहुंचते हैं।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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