मंडला : BSF के जवान गिरिजेश कुमार उदडे बांग्लादेश सीमा के पास आतंकी हमले में शहीद, रविवार को होगा अंतिम संस्कार

जबलपुर, संदीप कुमार। मध्यप्रदेश के मंडला के बीएसएफ के जवान गिरिजेश कुमार उदडे बांग्लादेश सीमा के पास आतंकी हमले में शहीद हो गए, उत्‍तर पूर्वी राज्‍य त्रिपुरा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर शुक्रवार सुबह आतंकवादियों ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) पर घात लगाकर हमला क‍िया था शहीद हुए जवान BSF की 145 वीं बटालियन के हवलदार गिरिजेश कुमार उदडे थे जो कि मंडला जिले के ग्राम चरगाव माल, विकासखंड बीजाडांडी के रहने वाले थे। मुठभेड़ के दौरान जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। काफी देर तक चली मुठभेड़ में जवान गिरजेश को चार गोलियां लगीं। उन्हें सेना के अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शव रविवार सुबह तक मंडला पहुंचेगा। इसके बाद यहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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बताया जा रहा हैं कि जब BSF की टीम कंचनपुर अनुमंडल के सीमा-II चौकी इलाके में एक अभियान पर थी, तभी बांग्लादेश की तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। भारी हथियारों से लैस उग्रवादियों ने बांग्लादेश के रंगमती पर्वतीय जिले के जुपुई इलाके से BSF जवानों पर गोलियां चलाईं। जवानों ने जवाबी कार्रवाई की, जिससे दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। मुठभेड़ के दौरान BSF के जवान ग्रिजेश को चार गोलियां लगीं थी। गिरिजेश कुमार के शहीद होने की खबर जैसे ही परिवार वालों को लगी तो परिजनों सहित पूरा गाँव शोक की लहर मे डूब गया। गिरिजेश कुमार के परिवार मे चार भाई और तीन बहन थे। सबसे बड़े भाई राजेंद्र कुमार गन कैरिज फैक्ट्री से रिटायर हुए थे। वही दूसरे नंबर के भाई रवि कुमार डिंडोरी में प्रिंसिपल थे। तीसरे नंबर के भाई शहीद गिरिजेश कुमार थे जिन्हें शुरू से ही शौक था कि वह सेना में जाकर देश की सेवा करें। गिरिजेश से छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ऑडनेंस फैक्ट्री खमरिया में स्टोर कीपर के पद पर पदस्थ हैं।

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गिरिजेश कुमार के घर मे पत्नी के अलावा उनके दो बेटे और एक बेटी हैं। सबसे बड़ी बेटी चन्द्रिका जबलपुर से बी.ए कर चुकी है। 15 दिन पहले ग्राम जमुनिया मे उसकी अतिथि शिक्षक में जॉब लगी थी। बड़ा बेटा विक्की बी.एस.सी फाइनल कर रहा हैं, छोटा बेटा रिंकू बी.कॉम सेकंड ईयर में है। तीन-चार दिनों से परिवार वालों से गिरिजेश की बात नहीं हो पा रही थी। लगातार फोन लगाने के बाद भी जब बात नहीं हों पाई तो परिवार वालों की चिंता बढ़ गई, और आखिरकार वही हुआ जिसका डर था। शुक्रवार की दोपहर को परिवार वालों के पास सूचना आई कि दुश्मनों से लड़ते हुए गिरिजेश शहीद हो गए। परिजनों ने बताया कि करीब 5 दिन पहले जब उनसे आखरी बार बात हुई थी तब वह कह रहे थे कि बच्ची की शादी करनी है तैयारी शुरू कर दे। परिवार बिटिया के लिए वर देखने की तैयारी भी शुरू कर दी थी। शहीद गिरिजेश कुछ दिनों से कह रहे थे कि बिटिया की शादी करना आप लोग तैयारी करें। परिजनों को उन्होंने बताया था कि बॉर्डर की स्थिति अच्छी नहीं है। फिर भी पहले करूंगा देश की सेवा करूंगा और फिर शान से करूंगा बिटिया की शादी। शहीद गिरिजेश के बड़े भाई राजेंद्र की पत्नी के निधन होने पर वह एक माह की छुट्टी लेकर गांव आए हुए थे। गांव मे ही उन्होंने मकान बनवाया था। कुछ माह पहले ही नए मकान का उद्घाटन भी हुआ था हालाँकि उस समय वह बार्डर मे तैनात थे। मकान बन जाने और बिटिया चन्द्रिका की अतिथि शिक्षक में नौकरी लग जाने से शहीद गिरिजेश बहुत ही खुश थे। बस उनका एक अरमान था अपनी बिटिया की शादी जल्दी से जल्दी कर दे जिसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी थी।