Morena News: अमावस्या पर ऐतिहासिक शनि मन्दिर पर उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

मान्यता है कि शनिदेव को रावण की कैद से मुक्‍त कराकर ऐंती गांव के पास स्थित पहाड़ों पर छोड़ा गया था।  कहा जाता है कि त्रेता युग में बने मंदिर में शनि के प्रकोप वाला कोई व्यक्ति पूजा अर्चना करता है तो उसके कष्ट दूर हो जाते हैं।

मुरैना, संजय दीक्षित। शनि अमावस्या के दिन ऐंती पर्वत स्थित ऐतिहासिक शनि मंदिर (Shani Mandir) पर विराट मेला लगाया जाता है। इस बार भी कोरोना गाइड लाइन के साथ मेले का आयोजन किया गया है। मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। मेल को लेकर जिला प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं।

जिला प्रशासन पुलिस विभाग और मंदिर मेला प्रबंधन समिति की मेले पर पूरी नजर है।  रात 12:00 बजे से ही शनि देव मंदिर (Shani Mandir) के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए है। मंदिर में व्यवस्था की निगरानी के लिए कलेक्टर बी कार्तिकेयन, एसपी सुनील कुमार पांडे सहित सभी विभागों के अफसरों ने शुक्रवार से ही डेरा जमा लिया था और विभाग के अफसर को मेले में मौजूद रहने की सख्त निर्देश कलेक्टर द्वारा दिए गए थे। सड़क सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिला पुलिस क्यूआरएफ और होमगार्ड के जवानों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है।

ये भी पढ़ें – Bhopal News: भोपाल कलेक्टर का बड़ा फैसला, लगाया प्रतिबंध, आदेश जारी

शनिदेव पर तेल चढ़ाना पूजा का सबसे मुख्य हिस्सा है। शनि देव मंदिर (Shani Mandir) का गर्भ ग्रह छोटा है और यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में हर श्रद्धालु द्वारा तेल से भगवान शनि का अभिषेक हो सके इसके लिए मंदिर प्रबंधन ने चार तेल के कुंड बनवाए हैं। जो कुंड वीआईपी मार्ग में है और दो जिगजैग मार्ग में बनाए गए हैं। इन कुंडों में ही श्रद्धालुओं द्वारा तेल चढ़ाया जा रहा है जो पाइपों के जरिए भगवान शनि की मूर्ति पर पहुंचता है। शनि मंदिर के आसपास कई भंडारे भी लगाए गए हैं । अलग-अलग स्थानों पर पांच फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी खड़ी करवाई गई हैं। इस बार वाहन पार्किंग में प्रवेश निकासी के अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं। किसी का स्वास्थ्य बिगड़ता है तो तत्काल इलाज के लिए मंदिर के पास वन चौकी में 2 अस्थाई अस्पताल बनाए गए हैं। जहां चार एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम हर समय तैनात रहेंगी।

Morena News: अमावस्या पर ऐतिहासिक शनि मन्दिर पर उमड़ा भक्तों का जनसैलाब

मान्यता है कि शनिदेव को रावण की कैद से मुक्‍त कराकर ऐंती गांव के पास स्थित पहाड़ों पर छोड़ा गया था।  कहा जाता है कि त्रेता युग में बने मंदिर में शनि के प्रकोप वाला कोई व्यक्ति पूजा अर्चना करता है तो उसके कष्ट दूर हो जाते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या को न्याय के देवता का दिन माना जाता है। इस दिन शनिदेव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। जिन जातकों पर शनि की साढ़े साती और ढैय्या चल रही हैं। इन जातकों को इस दिन भगवान शनिदेव की पूजा अर्चना करनी चाहिए। जिन लोगों पर शनि की महादशा चल रही है। ऐसे सभी जातकों को मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही झूठ नहीं बोलना चाहिए। इससे शनिदेव क्रोधित होते हैं।  शनिदेव की पूजा करने से शांति और भाग्य उदय होता है। इस दिन जरूरतमंदों और गरीबों को वस्त्र, खाने की वस्तुओं को दान करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही तिल और तेल का दान भी जरूरी होता है।