वन विभाग के अमले पर खदान माफियाओं ने बरसाई ताबड़-तोड़ फायरिंग, जान बचाकर भागे कर्मी

माफियाओं ने हमले में करीब 50 से 60 राउंड फायर किए। हालांकि इसमें किसी भी वनकर्मी को हामी नहीं पहुंची हैं।

मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना जिले (Morena district) में दबंगों और माफियाओं के हौसले बुलंद होते नज़र आ रहे हैं। ताज़ा मामले में जिले के रिठौरा थाना क्षेत्र के ग्राम पडावली में खदान माफियाओं ने वन विभाग के हमले पर उलट फायरिंग कर दी जिसके डर से वन अमले को वापस उल्टे पांव भागना पड़ा। बताया जा रहा है कि माफियाओं के द्वारा फायरिंग में करीब 50 से 60 राउंड फायर किए गए हैं। हालांकि हमले में किसी भी वनकर्मी को हामी नहीं पहुंची हैं।

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वन विभाग के अमले पर खदान माफियाओं ने बरसाई ताबड़-तोड़ फायरिंग, जान बचाकर भागे कर्मी

वन विभाग के अमले के सदस्यों का कहना है कि हमले के दौरान अगर विभाग वापस नहीं लौटता तो उनकी जान चली जाती। लेकिन वहीं दूसरी तरफ विभाग के अधिकारी कुछ और ही बयान दे रहे हैं। उनके अनुसार अमला भागा नहीं है बल्कि अमले को देखकर उल्टे खदान माफिया फायरिंग करने के बाद भाग गए। जानकारी के अनुसार डिप्टी रेंजर जितेंद्र सोलंकी को सूचना मिली थी कि पड़ावली गांव स्थित पुरातत्व विभाग के रेस्ट हाउस के सामने सरकारी जमीन से पत्थरों का अवैध उत्खनन हो रहा है। रात को सवा 10 बजे के करीब वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो यहां स्थित जमीन से पत्थरों का उत्खनन करने में दो जेसीबी लगी हुई थीं। जैसे ही वन विभाग की टीम ने पत्थरों का अवैध उत्खनन रुकवाकर, जेसीबी को कब्जे में लेने का प्रयास किया तो अंधेरे में पुलिस पर पत्थरों से हमला शुरू हुआ, फिर फायरिंग होने लगी। दोनों के बीच मुठभेड़ में माफियाओं ने 50 से 60 गोलियां चलाईं। इस दौरान वनकर्मी पत्थरों की खदान के गड्ढों व पत्थरों के पीछे लेट गए। जब फायरिंग बंद हुई तो वनकर्मी जान बचाकर वहां से भागे।

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बता दें की खदान माफियाओं के द्वारा की गई फायरिंग से डरकर उल्टे पांव वापस भागने पर वन विभाग की काफी किरकिरी हुई है। विभाग के अधिकारी यह कहते हुए नज़र आ रहे हैं कि वन अमला भागा नहीं है बल्कि वन अमले को देखकर खदान माफिया भाग गए। जबकि देखा जाए तो वन अमले को पता था कि खदान माफियाओं की संख्या करीब सौ से अधिक है जो हथियारों के साथ छुपे हुए थे। तो वहीं वन विभाग के पास पर्याप्त बल नहीं था जिस कारण खदान माफियाओं को देखते हुए वन विभाग का अमला उल्टे पांव वापस आ गया। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वन अमले के साथ होते तो अमला माफियाओं के डर से उल्टे पांव वापस नहीं भागता बल्कि माफियाओं के कब्जे से मशीनों को जप्त करने की कार्रवाई करता। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हम ने पुलिस को फोन कर कहा था कि फ़ोर्स भेजी जाए, लेकिन पुलिस नहीं आई इसलिए माफियाओं की संख्या अधिक होने के कारण वन अमले को वापस लौटना पड़ा। वहीं इस पूरे मामले में रिठौरा थाना प्रभारी संजय किरार का कहना है कि जब  फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे तब तक वन विभाग का अमला खदान के पास से जा चुका था, इसलिए पुलिस भी वापस थाने आ गयी।