देवरी गौशाला का हाल-बेहाल, भूख-प्यास से तड़प कर गौवंशों की हो रही है मौत, निगम अधिकारी बने मौन !

एक ही गड्ढे में बड़ी संख्या में मृत गोवंश को डाल दिया जाता है, उसको मिट्टी से दबाया नहीं जा रहा इसलिए मृत गोवंश को जंगली जानवर व पक्षी नोंच-नोंच कर खा रहे थे।

मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना (Morena) के देवरी गौशाला (Deori Gaushala) का इन दिनों हाल-बेहाल हुआ पड़ा है। गौशाला में हर रोज करीब आधा दर्जन से अधिक गौवंश की मौत हो रही है। बता दें कि घायल गौवंशों को पकड़ कर गौशाला में इसलिए लाया जाता है, जिससे घायल गायों का ठीक से पालन-पोषण हो सके, लेकिन सब कुछ यहां उल्टा ही देखने को मिल रहा है, दरसअल यहां गौवंश का पालन नहीं बल्कि आए दिन गौवंश काल के गाल में समा रहा है। बता दें कि इस गौशाला में गौवंश को सूखा भूसा मिलता है पर अभी वो भी पर्याप्त नहीं मिल रहा है, बताया गया है कि जेसीबी मशीन खराब होने के कारण गोवंश को चारा भी नहीं डाला गया है। मशीन आज ही खराब हुई है या फिर कुछ दिन पहले खराब हुई है। लेकिन गोवंश के खनोटे देखकर ऐसा लग रहा था मानो गौवंशों को चारा कई दिनों से नहीं मिला है, खनोटे पूरी तरह साफ पड़े थे। गौवंश खनोटों के पास इसी आस में खड़ा था कि कब भूसा आए और पेट की आग बुझ सके।

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कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक भी कर चुके है निरिक्षण
देवरी गौशाला में कुछ दिन पूर्व कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक ने भी भ्रमण किया, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हो सका। गौशाला की देख-रेख के लिए करीब 16 कर्मचारी का स्टाफ तैनात है लेकिन प्रभारी, गार्ड सहित बमुश्किल पांच लोग गौशाला के अंदर काम करते हुए नजर आएंगे, अन्य कर्मचारी कहां पर काम कर रहे हैं, यह तो नगर निगम के अधिकारी ही जाने। फिलहाल देवरी गौशाला की व्यवस्थाओं को देखकर लग रहा है यहां गौवंश का पालन पोषण नहीं बल्कि उनकी मौत का रास्ता तय किया जा रहा है।

पशु चिकित्सक भी अक्सर रहते हैं गायब
यहां तैनात पशु चिकित्सक भी अक्सर गायब मिलते हैं। जिस तरह की व्यवस्थाएं यहां की जा रही हैं, उससे लगता है कि गौशाला का संचालन मजबूरी में किया जा रहा है। यहां काम करने वाले कर्मचारी ड्यूटी के हिसाब से काम करते हैं, अगर मन में गौसेवा का भाव लेकर काम करें तो सुधार की संभावना हो सकती है। देवरी गौशाला में रोजाना कई गौवंश के मरने की सूचना मिल रही थी। लेकिन सुबह होते ही उन मृत गौवंश को गौशाला के पिछले हिस्से में जमीन में गाढ़ दिया जाता था इसलिए पता नहीं चल पाता कि कितने गौवंश मरे हैं लेकिन जब जेसीबी खराब हुई तो मृत गौवंश को मौके से उठाया नहीं जा सका और वहां देखा तो एक दर्जन गौवंश मृत अवस्था में पड़ा था और आधा दर्जन मरणासन्न हालत में था। इनमें से तीन गौवंश तो एक्सीडेंटल वार्ड के अंदर मृत पड़े थे और पांच गौवंश अन्य स्थानों पर मृत हुए, उनको उठाकर एक्सीडेंटल वार्ड के सामने सड़क पर डाल दिया जिससे ये लगे कि ये एक्सीडेंटल थे जबकि उनकी मृत्यु सामान्यतौर गौशाला परिसर में होना बताया गया है। इसके अलावा एक गौवंश पीछे ट्यूबवेल के पास, एक गोशाला गेट के दाहिनी ओर, दो गौवंश अंदर टीनशेड के पीछे की साइड में मृत अवस्था में पड़े थे।

प्रशासन की प्लानिंग ठप
गौशाला के विकास को लेकर प्रशासन की प्लानिंग ठप हो गई। पूर्व में गौशाला को लेकर बैठक हुईं जिनमें बड़ी प्लानिंग तैयार की गई। गाय के गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन मंगाई गई, वहीं कंडे बनाकर बेचने की प्लानिंग भी तैयार की गई थी जिससे गौशाला की आय बढ़ाई जा सके लेकिन सभी प्लानिंग धरी रह गईं। वर्तमान आयुक्त भी गौशाला की स्थिति सुधारने के लिए काफी छटपटा रहे हैं लेकिन उनकी कार्यशैली के चलते व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं।

एक ही गड्ढे में बड़ी संख्या में मृत गोवंश को डाला
देवरी गौशाला में मृत गोवंश को पहले जमीन के अंदर अलग-अलग गहरा गड्ढा करके मिट्टी से दबा देते थे, लेकिन इस बार एक ही गड्ढे में बड़ी संख्या में मृत गोवंश को डाल दिया जाता है, उसको मिट्टी से दबाया नहीं जा रहा इसलिए मृत गोवंश को जंगली जानवर व पक्षी नोंच-नोंच कर खा रहे थे। इधर, विश्व हिंदू परिषद के विभाग संयोजक ओमकार सिंह राजपूत का कहना है कि हर रोज दर्जनों गौवंश भूख-प्यास से तड़प कर मर रहे है लेकिन निगम के अधिकारियों का गौशाला पर बिल्कुल भी ध्यान नही है। अगर गौशाला में गौवंशों की देखरेख और उनके चारे की व्यवस्था सही तरीके से नही की गई तो सभी गौशाला के प्रबंधक आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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