लॉक डाउन के दौरान पुलिस के दो रूप- कहीं सख्ती तो कहीं संवेदना

मुरैना|संजय दीक्षित| पुलिस की वर्दी का ख्याल आते ही एक कड़क दिखने वाले व्यक्ति की तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है लेकिन जब ये व्यक्ति असल में सामने आते है तो इसके अलग अलग रूप दिखाई देते हैं। कभी ये सख्त हो जाते है तो कभी ये संजीदा हो जाते है। लॉक डाउन के दौरान पुलिस के दो अलग अलग रूप हैं।

कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉक डाउन है। लोगों को घर से बाहर निकलने की इजाजत नहीं है ऐसे में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी पुलिस की है। बहुत से लोग मानते नहीं है तो उन्हें डंडे की भाषा में समझाना पड़ता है। पुलिस की इतनी सख्ती और कोरोना जैसी महामारी के बीच समाज के दुश्मन अपनी आदतों से बाज नहीं आते, फिर पुलिस को उनसे भी निपटना पड़ता है और सख्ती करनी पड़ती है लेकिन यही कड़क पुलिस उस समय संजीदा हो जाती है जब कोई बेजुबान सड़क पर भूखा प्यासा दिखाई देता हैं।तो उन्हें खाना खिलाकर उनकी भूख मिटाई जाती हैं।

पुलिसकर्मियों द्वारा घर से ना निकलने की हिदायत दी गई पर लोग नहीं मान रहे जिसके चलते पुलिस कर्मियों ने सख्त रवैया अपनाते हुए लोगों को मुर्गा बनाया जाता हैं या कान पकड़कर उठक बैठक लगवाई जाती है,और उन्हें यह चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है कि अगली बार अनावश्यक घूमते हुए दिखाई दिए तो उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।आज ऐसा ही पुलिस का संजीदा भरा चेहरा देखने को मिला जब बैंकों के बाहर भीषण गर्मी में सुबह से महिलाओं की लंबी कतार लगी हुई थी।जिसमे पुलिसकर्मी महिलाओं को सोशल डिस्टेन्स के बारे में समझाते हैं और प्यासे लोगों को मिनरल वाटर का पानी पिलाते हैं।तो कहीं न कहीं आज भी मानवता जिंदा हैं।