Ladli Bahna Yojana : पहले बेटियों की किस्मत संवारी, अब बहनों की बारी

Gaurav Sharma
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CM Shivraj Birthday and Ladli Bahna Yojan : जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री की बात होती है तब उन्हें सूबे का सरताज, प्रदेश का मुखिया जैसे नामों से बुलाया जाता है। लेकिन जब बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की होती है तो ये पहचान थोड़ी बदल जाती है। आम जनता के बीच वो प्रदेश के मुखिया की तरह नहीं बल्कि बेटियों के प्यारे “मामा” के रूप में जाने जाते हैं। महिलाओं के लिए वो उनके पांव पांव वाले भईया हैं, तो किसानों के लिए उनके अपने बेटे, उनके किसान पुत्र हैं। शिवराज की ये पहचान यूं ही किताबी नहीं है, इस पहचान को बनाने के लिए शिवराज ने वाकई पांव पांव चलते हुए प्रदेश में मीलों नापे हैं, हर वर्ग को कुछ न कुछ सौगात दी है।

बात करें बेटियों की उम्मीदों के पंख को परवाज देने की तो शिवराज ने शायद ही कोई कसर छोड़ी हो। शिवराज ने 18 साल में बेटियों के लिए कई योजनाएं शुरू की, जिसमें लाडली लक्ष्मी योजना प्रदेश की फ्लेगशिप योजना के रूप में ही जानी जाने लगी है। यह योजना बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पढ़ाई और विदाई तक उनका साथ निभाती है। इस योजना को प्रदेश की बेटियों ने इस कदर प्यार दिया कि इसका अनुसरण दूसरे राज्यों ने भी किया।

ऐसी है ‘लाडली लक्ष्मी’

लाडली लक्ष्मी योजना की कामयाबी ही वो वजह रही कि शिवराज ने अपने चौथे कार्यकाल में लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 शुरू की। मूल योजना एक अप्रैल 2007 में शुरू हुई जिसके अंतर्गत पहली और दूसरी बेटी की जिम्मेदारी जन्म से ही मध्यप्रदेश सरकार की हो जाती है। शर्त ये है कि बच्चे दो से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अभी हाल ही में इस योजना को एक्सटेंड करते हुए शिवराज सरकार ने 12वीं पास करके कॉलेज जाने वाली छात्राओं को 25 हजार रुपये देना शुरू कर दिया है। दो किश्तों में दी जाने वाली राशि की पहली किश्त 12,500 रु एमिशन लेने पर और इतनी ही रकम पढ़ाई पूरी करने के बाद दी जाती है। इसके अलावा मेडिकल, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के महंगे कोर्सेस पढ़ने वाली छात्राओं की पूरी फीस भी अब सरकार ही अदा करती है।

बेटियों ने कहा धन्यवाद

इस योजना का लाभ प्रदेश की हजारों बेटियों को मिल रहा है जो सीएम शिवराज को अपनी खुशी भी जता चुकी हैं। मई 2022 को खुद सीएम ने ट्वीट कर प्रदेश की बेटियों की कुछ चिट्ठियां साझा की थीं, जिसमें लाड़लियों ने उन्हें इस योजना के लिए धन्यवाद कहा था।

पंचायत में आरक्षण

शिवराज सिंह चौहान अपनी बेटियों को सशक्त बनाने के साथ ही आधी आबादी को राजनीति में मजबूत करने की दिशा में भी चल पड़े हैं। 2007 में सीएम ने बड़ा फैसला लिया महिलाओं को पचास प्रतिशत आरक्षण देने का। पंचायत चुनाव में ये लाभ महिलाओं को दिया गया ताकि हर तबके की महिला पूरी ताकत से अपने हक, अधिकार और सरकार की बात कर सके।

प्रथम पूजनीय बेटियां

लाडली लक्ष्मी जैसी योजना बनाने वाली शिवराज सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जो हर काम में सबसे पहले कन्या पूजन भी करती है। यहां हर सरकारी कार्यक्रम की शुरूआत बेटियों के पूजन के साथ शुरू होती है। सीएम ने इसकी आधिकारिक घोषणा 25 दिसंबर 2020 को की थी। उसके बाद ये दस्तूर बन गया कि जो भी काम शुरू होंगे उसमें बेटियां ही प्रथम पूजनीय होंगी।

बेटियों के लिए शिवराज सरकार की योजनाएं

लाडली लक्ष्मी योजना की सफलता पर कोई शक नहीं किया जा सकता। इस योजना के तहत प्रदेश में 42 लाख बेटियां रजिस्टर हो चुकी हैं। इस योजना के अलावा भी प्रदेश में बेटियों के लिए अलग अलग योजनाएं जारी हैं जिसमें कन्या विवाह या निकाह योजना, लाडो अभियान, शौर्या दल, स्वागतम लक्ष्मी योजना, उदिता योजना, ऊषा किरण योजना, लालिमा योजना, वन स्टॉप सेंटर, मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना, अटल बिहारी बाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन और मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम शामिल हैं।

प्रदेश में बढ़ीं बेटियां

सीएम शिवराज की इन योजनाओं के सहारे प्रदेश की बेटियां न सिर्फ आगे बढ़ रही हैं बल्कि उनकी संख्या भी बढ़ रही है। 1 दिसंबर 2021 के नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में लाडलियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2015-16 में प्रदेश में 1000 बेटों पर 927 थीं। साल 2020-2021 में ये आंकड़ा बढ़कर 1000 बेटों पर 956 बेटियों का हो गया है। इससे भी ज्यादा खुशी की बात ये है कि ग्रामीण इलाकों में बेटियों की संख्या प्रति हजार बेटों पर ज्यादा तेजी से बढ़ी है।

लाडली बहना योजना

आज 5 मार्च मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जन्मदिन है। अक्सर लोग जन्मदिन पर तोहफा लिया करते हैं लेकिन शिवराज आज अपनी लाखों बहनों को लाडली बहना योजना के जरिए तोहफा देने जा रहे हैं। आज मुख्यमंत्री प्रदेश भर में लाडली बहना योजना लॉन्च करने जा रहे हैं। इस योजना के जरिए सरकार हर महीने गरीब वर्ग की महिलाओं के खाते में प्रतिमाह हजार रुपए जमा करेगी। अनुमानित है कि इस योजना से करीब एक करोड़ बहनों को फायदा मिलेगा। आज से इस योजना के प्रपत्र भरे जाएंगे जिसके लिए प्रदेश सरकार युद्ध स्तर की तैयारी के साथ न केवल अमले को प्रशिक्षित कर रही है बल्कि बहनों को पूरी जानकारी भी मुहैया करा रही है। इस योजना पर प्रदेश सरकार 5 साल में लगभग 61000 करोड रुपए खर्च करेगी। इसके अलावा आज मध्य प्रदेश की 413 निकायों में शिव वाटिका बनाई जाएंगी जहां महिलाओं द्वारा पौधारोपण किया जाएगा।

नर्मदा के आंचल में पलने से सीएम शिवराज तक का सफर

मध्य प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का कीर्तिमान बना चुके शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959 को बुधनी में हुआ था। स्वर्गीय श्री प्रेम सिंह चौहान और स्वर्गीय श्रीमती सुंदरबाई चौहान के सुपुत्र शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्वर्ण पदक के साथ स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है। 1975 में आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भोपाल जो वर्तमान में मॉडल हाई सेकेंडरी स्कूल है, के छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। इसी दौरान उन्होंने आपातकाल का विरोध किया और 1976-77 में भोपाल जेल में बंद रहे। वे 1977 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक हैं। 1992 में उनका विवाह श्रीमती साधना सिंह चौहान के साथ संपन्न हुआ। अपने शुरुआती राजनीतिक कैरियर में विद्यार्थी परिषद के विभिन्न पदों पर रहने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व उन्होंने संभाला। 1990 में पहली बार बुधनी से विधायक बने और 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद बने।वे लगातार पांच बार विदिशा से सांसद रहे।2005 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया और 29 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कमलनाथ सरकार के 15 माह के कार्यकाल को छोड़कर शिवराज लगातार मुख्यमंत्री हैं और अपने विभिन्न नवाचारों के चलते देशभर के मुख्यमंत्रियों में सर्वाधिक लोकप्रिय भी।

 


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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है।

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