MP Tourism : क्या अपने देखा भोपाल का ताजमहल? रोचक है इसका इतिहास

MP Tourism : मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित एक इमारत को आगरा के ताजमहल की तर्ज पर बनाया गया, जो हूबहू ताजमहल की तरह दिखता है। इसे भोपाल का ताजमहल कहा जाता है। यह भी बेहद खूबसूरत है।

MP Tourism : आगरा के ताजमहल के बारे में तो सभी लोग जानते हैं और सभी ने इसकी कहानी भी सुनी हुए हैं। लेकिन ज्यादातर लोग भोपाल के ताजमहल के बारे में नहीं जानते हैं। आज हम आपको भोपाल के ताज महल के बारे में कुछ जानकारियां बताने जा रहे हैं। दरअसल मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित एक इमारत को आगरा के ताजमहल की तर्ज पर बनाया गया, जो हूबहू ताजमहल की तरह दिखता है। इसे भोपाल का ताजमहल कहा जाता है। यह भी बेहद खूबसूरत है। यहां दूर-दूर से लोग इसका दीदार करने के लिए आते हैं। तो चलिए जानते हैं भोपाल के ताजमहल के बारे में कुछ खास ऐतिहासिक और रोचक तथ्य –

किसने बनाया भोपाल का ताजमहल –

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सबसे पहले बात करते हैं भोपाल के ताजमहल को किसने बनाया है। आपको बता दें भोपाल के ताजमहल की कोई भी प्रेम कहानी आगरा के ताजमहल की तरह नहीं है, ना ही यह किसी की याद में बनाया गया है। लेकिन इस महल को शाहजहां बेगम के रहने के लिए बनाया गया था। शाहजहां बेगम भोपाल रियासत की बेगम थी। ऐसे में उनके लिए इस महल को स्पेशल बनाया गया था। अब यह ताजमहल काफी ज्यादा चर्चित है। यहां दूर-दूर से लोग इसका दीदार करने के लिए आते हैं। साथ ही इसकी तस्वीरें और वीडियो भी बनाते हैं।

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आपको बता दें इस महल को जब बनाया गया था तब इसमें सैकड़ों कमरे दिए गए थे। वहीं 8 बड़े हॉल इस महल में बनाए गए। जहां बैठक हुआ करती थी। साथ ही इन महल में ही दावत दी जाती थी। इस ताजमहल को काफी भव्यता के साथ निर्मित किया गया। इसकी खूबसूरती देखने लायक है। इसकी खूबसूरती के चलते ही इसे ताजमहल का नाम दिया गया। हालांकि लोग इसे राजमहल के नाम से भी जानते हैं।

जाने कब बनाया गया भोपाल का यह खूबसूरत ताजमहल –

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भोपाल के इस खूबसूरत ताजमहल का निर्माण 1871 में शुरू किया गया था। जिसके बाद 13 साल में इसे बनाकर तैयार किया गया। यह ताजमहल 1884 में बनकर तैयार हुआ। इस महल की वास्तुकला देखने लायक है। दरअसल, वास्तु कला में शाहजहां बेगम को काफी ज्यादा रुचि थी। इस वजह से आज यह वास्तुकला इस महल में देखने को मिलती है। इसके अलावा महल में जो भी नक्काशी की गई है वह पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। जब इस महल को बनाया गया था तब उसमें 3 लाख की लागत लगी थी।