फिर सीसीआई को बेचने के लिए मांगी रूचि, कारखाना चलाने की नियत संदेह में

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नीमच। केंद्र सरकार ने एक बार फिर रोजगार के प्रमुख आधार बनने वाले सीसीआई नयागांव को बेचने का मन बना लिया है। दो मार्च को जारी एक विज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार की नीति और सांसद की नियत उजागर हो गई है। एक तरफ जहां कारखाना चालू करने की नोटंकी चल रही थी वहीं अब उसे बेचने की जमीन तैयार की जा रही है। इससे क्षेत्र में रोजगार मिलने की आषाएं धराषायी हो सकती है।

यह बात यहा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में सीटू के प्रदेष सचिव कामरेड षैलेंद्रसिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि 2012-13 में भी सरकार इस सीमेंट फैक्ट्री के बेचने के प्रयास किए गए थे। विभिन्न समाचार पत्रों में सीसीआई नयागांव नीमच की सीमेंट फैक्ट्री को बेचने के लिए विभिन्न कंपनियों से रूचि की अभिव्यक्ति के लिए विज्ञापन छपे हैं। इससे एक बार फिर सीसीआई को चलाने को लेकर सरकार की नियत संदेह के घेरे में आ गई है। पहले इसी प्रकार की विज्ञप्ति में सरकार ने फैक्ट्री की कीमत 460 करोड रुपए लगाई थी। तत्समय किए गए आंकलन के अनुसार सीसीआई नयागांव की सभी परिसम्पतियों का मूल्य करीब 3500 करोड रुपए आंका गया था। जिससे सीसीआई की खदान, फैक्ट्री, पानी के स्त्रोत और विभिन्न षहरों में स्थापित सम्पतियां षामिल थी। किंतु इस बार सरकार ने विज्ञापन में बडी चालाकी से सभी आवष्यक जानकारियों को जनता की नजर से छिपाने का प्रयास किया है। तथ्य यह है कि समाचार पत्र  में विस्तृत जानकारी देने के बजाय वेबसाईट के माध्यम से सारी जानकारी देने की बात कही जा रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक दिन पहले और बाद के अन्य टेंडर विज्ञापन में दी गई वेबसाईट पर नजर आ रहे हैं, लेकिन सीसीआई सीमेंट फैक्ट्री नयागांव को लेकर जानकारी खोजने से भी नहीं मिल रही है। जाहिर है सरकार और उनके नुमाईदों की नियत में खोट है। कामरेड श्री ठाकुर ने बताया कि एषिया में सबसे उच्च कोटी का लाईम स्टोन की बेहतरीन खदान रखने वाली इस फैक्ट्री को बेचने के लिए इस प्रकार से रूचि की अभिव्यक्ति मांगा जाना निःसंदेह निराषाजनक है। सबसे अच्छी बात यह है कि सीसीआई नयागांव का यह प्लांट भौगोलिक दृष्टि, उपलब्ध संसाधनों तथा उद्योग के संचालन में जरूरी अन्य अनिवार्यताओं के लिए सबसे उपयुक्त है। फैक्ट्री के पास बेहतर खनिज है। प्रचुर मात्रा में पानी है। परिवहन के लिए निकट ही रेल एवं रोड की सुविधा है। ऐसी तमाम अनेकानेक सुविधाओं से सज्जित फैक्ट्री को बेचना केंद्र सरकार और सीमेंट कार्पोरेषन ऑफ इंडिया लिमीटेड का तो गलत निर्णय है ही साथ क्षेत्रवासियों की आषाओं पर गहरा कुठाराघात है। गौरतलब है कि समीप ही चल रहे निजी स्वामित्व के सीमेंट उद्योग में स्थानीय लोगों को नगण्य रोजगार मिल रहा है और सीसीआई के संचालन से लोगों को आस थी कि उन्हें रोजगार मुहैया होगा।

इसके पहले भी सीसीआई को बेचने का विरोध सीटू द्वारा किया गया था और बिक्री प्रक्रिया रूक गई थी। क्षेत्रीय सांसद द्वारा समाचार पत्रों के माध्यम से सीसीआई को चलाने के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में ढोल पीटा जा रहा था, लेकिन  बिक्री के विज्ञापन के बाद सांसद को पूरी स्थिति साफ करना चाहिए। संदेह है कि स्थानीय कंपनियों को लाभ पहुॅचाने की गरज से यह कार्य किया जा रहा है। जिनकी नियत फैक्ट्री को चलाने के बजाय केवल सीसीआई की खदान को हथियाने की है। सीटू इस बिक्री का विरोध करती है और पूर्व की तरह इस प्रक्रिया के विरूद्ध आंदोलन करेगी। सीटू का यह प्रयास रहेगा कि क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख आधार बनने वाली इस फैक्ट्री को पुनः सरकारी क्षेत्र में चलाने के लिए राजनीतिक, गैरराजनीतिक और सामाजिक संगठनों को आंदोलन से जुडने के लिए आह्वान करेगी।

(मोबाईल नंबर 9424071477 )