नीमच में दबंगों ने दलित दूल्हे को घोड़ी चढ़ने से रोका, पुलिस की सुरक्षा में धूमधाम से निकली बारात

नीमच,कमलेश सारडा। देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए और एक दिन पहले ही हमने 73 वा गणतंत्र दिवस जोर शोर से मनाया लेकिन आज भी इस देश मे ऐसी कई कुप्रथाएं या यूं कहें दबंगो की दबंगई गावो में जसके चलते दलित वर्ग शोषित और पीड़ित है ,ऐसा ही एक मामला आज मप्र के नीमच (neemuch) जिले के सरसी गांव में देखने को मिला जहाँ एक दलित युवक को अपनी शादी पर बिन्दोली गांव में निकलने को लेकर पुलिस की मदद लेना पड़ी। जी हां यहा गांव के दबंग मीणा समाज के लोगों की दहशत के चलते दलित युवक राहुल मेघवाल ने अपनी बिन्दोली को गांव में निकलवाने को लेकर एक आवेदन पुलिस में दिया था जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और आज राहुल की बिन्दोली पुलिस के साये में गांव में निकली नीमच के मनासा थाना अंतर्गत ग्राम सारसी में आज दोपहर एक दलित युवक की बरात को लेकर मामला गर्माया रहा।

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हम आपको बता दें कि गांव के दबंगों ने युवक के परिवार को मंदिर के सामने से घोड़ी चढ़कर बारात निकालने से मना किया था। इस पर युवक राहुल सोलंकी व उसके परिवार ने बारात निकालने के लिए पुलिस से सुरक्षा देने की मांग की थी। इस पर पुलिस ने गांव में शादी से एक दिन पहले ही पुलिस को तैनात कर दिया गया था। गुरुवार को डीजे बजवाकर धूमधाम से दलित युवक की बारात निकाली। दलित युवक की बारात निकालने के लिए गांव में 100 से ज्यादा पुलिस के जवान तैनात किए थे। गांव में हर रूट पर जवान दिखे। आगे पुलिस जवान फ्लैग मार्च करते हुए तो बारात में बाराती डीजे की धुन पर नाचते-झूमते हुए चल रहे थे।

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थाना प्रभारी कन्हैयालाल दांगी ने बताया कि ग्राम सारसी में बारात रोके जाने की आशंका को लेकर पुलिस और प्रशासन ने गांव में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। इसके बाद दलित दूल्हे की बारात धूमधाम से निकाली गई। दूल्हे राहुल सोलंकी का कहना है कि दबंगों द्वारा मंदिर के सामने से घोड़ी पर बैठकर नहीं निकलने दे रहे थे साथ ही 1 दिन पूर्व रात्रि में ही मार्ग में पत्थर फेंक दिए ताकि बिंदोली ना निकाली जा सके, लेकिन पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में बिंदोली निकाली गई। वहीं मामले में मनासा टीआई के.एल दागी का कहना है कि गांव में ऐसा कोई माहौल नहीं है, और गांव वालों ने कोई रोक नहीं लगाई है। वही भीम आर्मी के पूर्व प्रदेश प्रभारी सुनील अस्थई का कहना है कि यह इस गांव में पहला मामला है कि जब किसी दलित की घोड़ी पर बैठकर बिंदोली निकाली जा रही है।