निवाड़ी : अनुसूचित जनजाति के लिए पद रिजर्व, पूरे गांव में एक भी वोटर नहीं

निवाड़ी जिले की ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द में नहीं बनेगा कोई सरपंच, आरक्षण की प्रक्रिया दोबारा होगी और फिर कराए जाएंगे चुनाव

पंचायत चुनाव

निवाड़ी, डेस्क रिपोर्ट। निवाड़ी जिले की एक ग्राम पंचायत ऐसी भी है जहां पर सरपंच पद के लिए चुनाव नहीं होंगे। इसकी वजह आरक्षण प्रक्रिया है, जिसके कारण जिस वर्ग के लिए इन पंचायतों में सरपंच का पद आरक्षित किया गया है उस वर्ग का एक भी मतदाता यहां नहीं है। इसलिए सरपंच पद पर नामांकन ही नहीं हो सका है। अब इन पंचायतों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया दोबारा होगी और फिर चुनाव कराए जाएंगे।

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हम बात कर रहे है निवाड़ी जिले की ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द की। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव की नामांकन प्रक्रिया 6 जून को समाप्त हो गई। इसके बाद जो स्थिति सामने आई है। उसके तहत ओरछा तहसील की ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द में इस बार सरपंच पद के चुनाव नहीं होंगे। इसकी वजह आरक्षण प्रक्रिया में खामी सामने आई है। चौकाने वाली बात है कि आरक्षण प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई थी, लेकिन पूरी ग्राम पंचायत में इस वर्ग का एक भी मतदाता यहां रहता ही नहीं है। ऐसे में अनुसूचित जनजाति का एक भी मतदाता नहीं होने से किसी ने नामांकन ही दाखिल नहीं किया। इस ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति की संख्या शून्य है। मामले में ओरछा तहसीलदार संदीप शर्मा ने बताया कि आरक्षण के वक्त ग्राम पंचायत गुजर्रा खुर्द की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई थी, लेकिन एक भी मतदाता वहां पर अनुसूचित जनजाति का नहीं था, इस कारण किसी ने भी सरपंच पद के लिए आवेदन नहीं किया। आरक्षण के वक्त गलती होने के कारण यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई। गांव में रहने वाले सरकारी शिक्षक रूपेंद्र राजपूत ने बताया कि यहां की सीट एसटी के लिए आरक्षित है, लेकिन एसटी वर्ग का यहां पर कोई भी नहीं रहता। गांव के ही राममिलन तिवारी ने बताया कि यहां पर अनुसूचित जनजाति का कोई नहीं होने के कारण सरपंच का चुनाव नहीं हो रहा। गांव का विकास कैसे होगा इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जनपद काम करवाएगी।

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दोबारा करवाए जाएंगे चुनाव
नियम के अनुसार 6 महीने में इस ग्राम पंचायत में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे। तब तक इस पंचायत का संचालन प्रशासनिक स्तर पर किया जाएगा। अभी वर्तमान में जो चुनाव की आचार संहिता लगी हुई है, उसके रहने तक पंचायत सचिव और कलेक्टर द्वारा नियुक्त एक अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से इस पंचायत में काम हो सकेंगे। जब आचार संहिता खत्म हो जाएगी, तब चुने गए पंच किसी सदस्य को सरपंच के रूप में चुन लेंगे और 6 महीने तक पंचायत का संचालन होगा।