Illegal Sand Mining: रेत कारोबारी का अवैध खनन, प्रशासन कर रहा तबाही का इंतजार, ग्रामिणों के घर बहने का खतरा

उनके खेतो को खोद कर रेत निकली जा रही। हालात यह हो गये है कि आने वाले समय मे एक दर्जन से अधिक गांव वालों को घर छोड़ना पड़ेंगे, नहीं तो घर नदी में बह जायेगे।

पन्ना, भारत सिंह यादव। रेत कारोबारीयों (Mafia) ने दर्जन भर गांवों को जोड़े  रखने वाली केन नदी (Ken River) की धार से, केन नदी के साथ-साथ पट्टे वाली भूमि का जबरन एग्रीमेंट (Agreement) करवा कर उपजाऊ भूमि से रेत निकाल रहे है। ऐसे में यह लोग उपजाऊ भूमी (Arable Land) को बंजर करने में लगे है, यह है मल्होत्रा के हथियार बन्द लोग, जिन्होंने ग्रामिणों  का जीना हराम किया हुआ है।

Illegal Sand Mining: रेत कारोबारी का अवैध खनन, प्रशासन कर रहा तबाही का इंतजार, ग्रामिणों के घर बहने का खतरा

हालात यह हो गये है कि आने वाले समय मे एक दर्जन से अधिक गांव वालों को घर छोड़ना पड़ेंगे, नहीं तो घर नदी में बह जायेंगे। नदियों में खुले आम चल रही लिफ्टर व एल एन टी मशीनों की मदद से जीव जंतुओं की भी मौतें हो रही हैं। प्रसाशन यह सब देखकर भी अनदेखी कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि माफियाओं को 10 फिट गहरे गड्ढे में गाड़ दूंगा। लेकिन, पन्ना में खुलेआम माफिया गिरी और गुंडा राज देखने को मिल रहा है।

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पन्ना जिले के अजयगढ तहसील में लगातार एक वर्ष से रेत का अवैध उत्तखनन रेत कारोबारी राष्मीत सिंह मल्होत्रा द्वारा किया जा रहा है। जिसकी खबर शासन-प्रशासन को भी है। लेकिन, आज दिनांक तक प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है। जबकि समाचार पत्रों में एवं शोसल मीडिया में रेत कारोबारी की खबरे आये दिन सुर्खियां बटोरती रहती हैं।
जिले की अजयगढ तहसील दर्जन भर गांवों में किसानों की निजी भूमियों पर ठेकेदार द्वारा अवैध खनन किया जा रहा है। अगर कोई भी ग्रामीण अवैध खनन की शिकायत करता है,  तो उन पर झूठे मुकदमे ठेकेदार द्वारा दर्ज करवा दिये जाते है। जिससे ग्रामीण भी भयभीत हैं।

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ग्रामीणों ने रेत कारोबारी रस्मित सिंह मल्होत्रा की शिकायतें स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक की है। लेकिन, ठेकेदार के सामने ग्रामीणों की शिकायतों का कोई असर नहीं होता दिख रहा है। ऐसे में अब बेचारे ग्रामीण थक कर अपने घर बैठ गए हैं। रेत कारोबारी ने एक दर्जन गांवों को सीधे केन नदी से जोड़ दिया है,आने वाले समय मे सैकड़ों घर नदी में बह सकते हैं और हजारों की तादाद में जानवरों के मरने का खतरा मंडरा रहा है।

जनप्रतिनिधियों को नहीं है जनता की परवाह

ग्रामीणों का कहना है कि हमारे यहां वोट मांगने के लिए जनप्रतिनिधि आते हैं, चाहे वो सत्ता पक्ष के हो या विपक्ष के हमारा ख्याल किसी को नहीं है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि हमे रात दिन एक ही डर बना रहता है कि बारिश में हम लोग अपने बच्चे एवं पशुओं को लेकर कहा जाएंगे। क्योंकी उनके खेतो को खोद कर रेत निकली जा रही और खेतों की खुदाई 50,60 फिट से ज्यादा करवाई जा रही है। ऐसे में बरसात और गर्मी के मौसम में घरेलू एवं जंगली जानवरों के ज्यादा मारने की संभावना है। अभी तक लगभग सेकड़ो जीव जंतुओं की मत्यु हो चुकी है।