Public Hearing: अवैध खनन की कहानी, गांव वालों की जुबानी, पर्यावरण जन सुनवाई में अधिकारियों के माथे से झलका पसीना

पन्ना जिले के केन नदी का रेत खनन का ठेका रश्मीत सिंह मल्होत्रा कम्पनी होशंगाबाद (Hoshangabad) को पिछले वर्ष हासिल हुआ था। इस कंपनी ने केन नदी (Ken river) में संचालित रेत खदानों की आड में नियम कानून को ताक पर रखकर केन नदी में अवैध खनन किया। है।

पन्ना, भारत सिंह यादव। पर्यावरण नियम कानून (Environmental law)  की सभी हदों को पार कर रेत खदान ठेकेदार रस्मीत मल्होत्रा एक साल से केन नदी (Ken River) का सीने को छलनी कर रहा था। जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन रस्मीत मल्होत्रा के आगे मौन हैं। एक समय बुंदेलखंड के पन्ना जिले के तराई अंचल में दस्यु डकैतों के आतंक से लोग भयभीत थे। तराई मे डकैतों का खोफ था। लेकिन, अब डकैतों के खात्मे के बाद पन्ना जिले के तराई अंचल में रेत कारोबारी के गुंडों के आतंक से लोग भयभीत है। पन्ना जिले के केन नदी का रेत खनन का ठेका रश्मीत सिंह मल्होत्रा कम्पनी होशंगाबाद (Hoshangabad) को पिछले वर्ष हासिल हुआ था।

Public Hearing: अवैध खनन की कहानी, गांव वालों की जुबानी, पर्यावरण जन सुनवाई में अधिकारियों के माथे से झलका पसीना
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इस कंपनी ने केन नदी (Ken river) में संचालित रेत खदानों की आड में नियम कानून को ताक पर रखकर केन नदी में अवैध खनन किया। वहीं रेत ठेकेदार मल्होत्रा ने किसानों की निजी भूमि एवं शासकीय गौचर भूमि पर भी अवैध रेत का खनन किया है। जिनमें रामनई, बरौली, चंदोरा, जिगनी, मोहना, मझगाय एवं बीरा गांव शामिल हैं। शासकीय गोचर भूमि एवं किसानों की निजी भूमि में दो दर्जन से अधिक LNT मशीने लगाकर इस कदर अवैध रेत खनन किया जा रहा है कि, किसानों के खेतों में गहरी-गहरी खदाने दिखने लगी हैं।

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पिछले एक वर्ष से इस कंपनी ने क्षेत्र के भोले-भाले किसानों की जमीनें खोदी, उनकी फसल रोंदी। इतना ही नहीं जिन्होंने कंपनी के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की उन्हें प्रशासन की आड़ में झूठे मुकदमों में फशा दिया गया। जिले की अविरल केन नदी को एक साल में छलनी कर दिया गया है। अब दोबारा केन नदी को खोखला करने के लिए मल्होत्रा कंपनी अब फिर नियम कानून का ढकोसला कर गांव में पर्यावरण के नाम पर कैंप लगाकर गाव वालों को गुमराह करने का ढोंग रचा रही है। इन कैंपो में ठेकेदार की करतूतों का ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया है। ग्रामीणों ने जब जन सुनवाई में कंपनी के गुंडा गर्दी व अवैध खनन (Illegal mining) की बात सामने रखी तो पर्यावरण जन सुनवाई में आए अधिकारियों के माथे में पसीना झलकने लगा ग्रामीणों ने यहां तक कह डाला कि मल्होत्रा कंपनी पिछले एक साल से शासन प्रशासन को अपनी उंगलियों में नचा कर अजयगढ़ क्षेत्र के किसानों की जमीनें रोंद रहा है और केन नदी में अवैध खनन कर रहा है।