सैनिकों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव, VRS लेने पर कट सकती है पेंशन

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, 20-25 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पुरुषों को 50 प्रतिशत हकदार पेंशन मिलेगी, जबकि 25-30 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वालों के लिए यह 60 प्रतिशत होगी।

retirement age in Indian army
Jammu and Kashmir, Jan 26 (ANI): Army Jawans hold the National Flag and raise slogans near the snow-covered border on the occasion of 71st Republic Day in Kupwara on Sunday. (ANI Photo)

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन द्वारा एक प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें आर्मड फोर्स में मैनपावर को लेकर नए सुधारों की बात कही गई है। प्रस्ताव में तकनीकी शाखाओं से अधिकारियों और जवानों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की बात कही गई है। इस पहल के एक हिस्से के तौर पर जनरल बिपिन रावत के अधीन आने वाले मिलिट्री अफेयर्स विभाग ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि रक्षा बलों में अत्यधिक कुशल जनशक्ति को बनाए रखने के लिए, समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने वाले अधिकारियों की पेंशन योग्यताओं को संशोधित किया जाए।

सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि सशस्त्र बलों में जनशक्ति के ज्यादा से ज्यादा उपयोग के लिए ये सभी प्रस्ताव शुरू किए जा रहे हैं। प्रस्ताव में मौजूदा 54 साल से कर्नल और वायु सेना और नौसेना में समकक्षों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 57 करने की परिकल्पना की गई है। ब्रिगेडियर और उनके समकक्षों जिनकी सेवानिवृत्ति 56 साल में होती थी उसे भी दो साल बढ़ाकर 58 साल करने की बात कही गई है।

मेजर जनरल्स जोकि 58 साल में सेवानिवृत्त होते थे वो 59 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। लेफ्टिनेंट जनरलों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल ही रहेगी। लॉजिस्टिक, टेक्निकल और मेडिकल ब्रांच में जूनियर कमीशंड ऑफिसर और जवानों के लिए रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 57 साल कर दी गई है और इसमें भारतीय सेना की EME, ASC और AOC शाखाएं भी शामिल होंगी।

वहीं समय से पहले रिटायरमेंट लेने वाले कर्मियों के लिए पेंशन में प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, 20-25 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पुरुषों को 50 प्रतिशत हकदार पेंशन मिलेगी, जबकि 25-30 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वालों के लिए यह 60 प्रतिशत होगी। 35 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पुरुष अपनी पूरी पेंशन के हकदार होंगे। बताया जा रहा है कि युद्ध में हताहत या चिकित्सा कारणों से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के लिए पेंशन पात्रता में कोई संशोधन नहीं होगा।

जनरल रावत भी इन पहलों का समर्थन करने के लिए और अधिक प्रस्ताव ला रहे हैं और उन अधिकारियों के लिए बेहतर मार्ग प्रदान करेंगे जो कम रिक्तियों और सेवा प्रतिबंधों के कारण बाहर हैं ।बताया जा रहा है कि इन पहलों का कारण यह है कि कई विशेषज्ञ और सुपर विशेषज्ञ हैं, जो सशस्त्र बलों में अत्यधिक कुशल नौकरियों के लिए प्रशिक्षित होते हैं पर इसे अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए छोड़ देते हैं।

सूत्रों के अनुसार ज्यादा कुशल मैनपावर के नुकसान के चलते सेवा कौशल मैट्रिक्स में शून्य हो जाता है और सशस्त्र बलों के प्रति-उत्पादक होता है। इस दृष्टि से, समय से पहले सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मियों की पेंशन पात्रता की समीक्षा करने का निर्णय लिया जा रहा है। संबंधित लोगों के साथ चर्चा करने के बाद है, जल्द ही प्रस्ताव की योजना को लागू कर दिया जाएगा।

 

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