रतलाम में सेल्समैन की मनमानी से कोरोना काल में राशन के लिए परेशान हो रहे हैं ग्रामीण

रतलाम, सुशील खरे। पूरे मप्र (MP) में कोरोना (Corona) ने जनता को परेशान कर रखा है। वही गरीब परिवार भी इस महामारी में दाने-दाने को मोहताज है। वहीं शासन- प्रसाशन गरीबों की मदद के लिए तमाम प्रयास कर रह हैं, लेकिन कुछ लोग उनके इन प्रयासों पर पलीता लगा देते है। ताजा मामला रतलाम (Ratlam) का है। जहां लॉकडाउन (Lockdown) में अपने बच्चों का पेट भरने के लिए शासन द्वारा दिए जा रहे राशन को लेने के लिए आस-पास के 5 गांवों के लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर राशन लेने मूंदड़ी आते है। लेकिन सेल्समैन की मनमानी से ग्रामीणों को खाली हांथ घर लौटना पड़ता है।

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राशन के लिए तेज धुप में बैठे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि वो सुबह 8 बजे ही यहां आकर जमीन पर अपना राशन कार्ड रख कर अपना नम्बर लगाते है। और झुलसा देने वाली धूप में तपते रहते है ताकि उन्हें अपने बच्चों के लिए राशन मिल जाए। लेकिन सेल्समैन 12 बजे आकर कुछ लोगों को राशन देकर 1 बजे ताला लगाकर चला जाता है। उसके पुनः वापस आने की उम्मीद में ग्रामीण राशन की आस लगाए घण्टो वहां बैठे रहते है। लेकिन सेल्समैन नहीं आता जिसके बाद ग्रामीण शाम होने के बाद निराश होकर घर चले जाते है।

न मास्क न सोशल डिस्टेंसिंग, कोरोना विस्फोट का डर
उल्लेखनीय की राशन के लिए दूर-दराज आये ग्रामीण छाया की तलाश में एक समूह के रूप में एकत्रित होकर कहीं पर भी बैठ जाते हैं। जिससे सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का उल्लंघन तो होता ही है।वहीं ऐसे में कोरोना विस्फोट होने का भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण अंचलों में जिस प्रकार तेजी से कोरोना फेल रहा है उस से कोई भी अनजान नहीं है। लेकिन इस तरह की भीड़ को इक्कठा करना या होना कोरोना को बढ़ावा देना है। जबकि पूर्व जिला खाद आपूर्ति अधिकारी कह चुके हैं कि इस प्रकार की भीड़ कहीं पर भी इक्कठा नहीं होती है। टोकन सिस्टम व्यवस्था लागू की गई है। परंतु यहां बिल्कुल उल्टा देखने को मिला यहां न तो कहीं पर भी उनकी टोकन सिस्टम व्यवस्था नजर आई और न ही राशन। बतादें कि पूरे जिले में इस प्रकार की अव्यवस्था देखने में आ रही है जो देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुखिया की योजनाओं को पलीता लगा रही है।

इधर जब पूरे मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि सेल्समैन 12 बजे आया और 1 बजे ताला लगाकर चला गया ।  प्रतिदिन उसके द्वारा ऐसा किया जाता है। जिसके बाद 1 बजे राशन की दुकान बंद करने का कारण जानना चाहा और सेल्समैन को लगातार कई फोन लागाए गए। लेकिन उसने फोन नही उठाया। शाम होने पर राशन की आस में कई किलोमीटर पैदल चलकर आये ग्रामीणों को निराश होकर खाली हाथ जाना पड़ा। लॉकडाउन के इस दौर में सेल्समैन की ऐसी हरकत से कई लोगों के परिवार को भूखा सोना भी पड़ सकता है। हालांकि शासन ने लेट समय तक शाकीय उचित मूल्य की दुकानो को खोलने के निर्देश दिए है। लेकिन उनके इन निर्देशो का सेल्समैन पर कोई असर नही है। और वह अपनी मनमानी कर रहे है। अब देखना होगा की अधिकारी इस तरफ कब तक ध्यान देते है या फिर कोई बड़ी अनहोनी होने का इंतज़ार कर रहे हैं।

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