मध्यप्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने की राजगढ़ घटना की कड़ी निंदा, सरकार से कलेक्टर पर कार्रवाई की मांग

राजगढ़/मनीष सोनी

राजगढ़ (Rajgarh) में कलेक्टर (collector) द्वारा डाक्टरों (doctors) के साथ की गई अभद्रता की म. प्र. चिकित्सा अधिकारी संघ ने कड़ी निंदा की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ देवेन्द्र गोस्वामी (Dr. devendra goswami) ने एक बयान में इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए शासन (government) से दुर्व्यवहार करने वाले के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

संघ ने कहा है कि वर्तमान समय में सभी चिकित्सक (doctors) कोरोना संक्रमण को रोकने के कार्य में निरन्तर कार्य कर रहे हैं। चिकित्सक भी प्रथम श्रेणी व द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी हैं उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दुर्व्यवहार कहां तक उचित है। इस तरह की घटना से प्रदेश के सभी चिकित्सक आहत हैं और इस तरह की घटना से प्रदेश के चिकित्सकों का मनोबल गिरेगा। अतः म प्र चिकित्सा अधिकारी संघ ने मांग की है कि जनहित इस तरह की घटनाओं को रोका जाना चाहिए साथ ही दोषी पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

बता दें कि सोमवार को राजगढ़ (rajgarh)के कलेक्टर (collector) नीरज सिंह (neeraj singh) द्वारा मीटिंग (meeting) के नाम पर सिविल सर्जन ऑफिस (civil surgeon office) में की गई तथाकथित अभद्रता से नाराज राजगढ़ के समस्त सरकारी डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग (health department) के प्रमुख सचिव (principal secretary) को लिखे गए पत्र में डॉक्टरों ने आरोप लगाया है कि आज दोपहर 4:00 बजे कोरीना समीक्षा बैठक सिविल सर्जन ऑफिस में रखी गई थी और इस मीटिंग में बारी-बारी से कलेक्टर द्वारा सभी उपस्थित डॉक्टरों के साथ में अभद्र व्यवहार किया गया।

सबसे पहले एमडी मेडिसिन डॉक्टर सुधीर कलावत से बातचीत के दौरान कलेक्टर (collector) ने कहा “तुम्हें डिग्री किसने दी है। तुम्हें रेफर करने का कोई अधिकार नहीं ।”इसके बाद डॉ स्पूतनिक यदु सिविल सर्जन से कलेक्टर बोले “तेरे को नौकरी करते हुए कितने साल हो गए। मूर्ख है। तुझे कुछ नहीं आता है। तेरी प्रशासनिक व्यवस्था निकम्मी है।” कलेक्टर इसके बाद सीएमओ राजगढ से बोले ”तूने हर एक एडीएम को 20-20 पीपीई किट क्यों नहीं दी है ।

इसके जवाब में डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार मैंने बीएमओ पीपीई किट दे दी है ।इस पर कलेक्टर ने फिर श्रीवास्तव से कहा” मैं सभी को सस्पेंड कर दूंगा। तेरी प्रशासनिक व्यवस्था निकम्मी है। पीपी किट क्यों प्रदान नहीं करी ।”डॉक्टरों का कहना है कि कलेक्टर के इस तरह के व्यवहार से मानसिक क्षति हुई है। साथ ही साथ सभी का मनोबल टूटा है और इस घटना से जिले के सभी साथी चिकित्सकों ने पूरे जिले में कार्य नहीं करने का निर्णय लिया है।

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