दिग्विजय के गढ़ में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, विरोध के बावजूद रोडमल नागर ने रचा इतिहास

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राजगढ़| मनीष सोनो| कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल लोकसभा से प्रत्याशी रहे दिग्विजय सिंह को दोहरा झटका लगा है| भोपाल में जहां वे चुनाव हार गए, वहीं उनके गढ़ राजगढ़ में इस बार बीजेपी के रोड़मल नागर ने अब तक की सबसे बड़ी जीत का इतिहास रच दिया है। मतगणना की शुरुआत में ही भाजपा के रोडमल नागर ने जीत का सिलसिला बैलेट पेपर से शुरू किया जो आखिरी राउंड तक बरकरार  रखा और पूरी मतगणना के बाद रोडमल नागर ने राजगढ़ में अपनी जीत का इतिहास रच दिया|

पहली बार में वे लगातार भाजपा के सांसद बने वह ना सिर्फ राजगढ़ लोकसभा के लिए बल्कि प्रदेश की सबसे बड़ी जीत में अपना नाम शामिल किया वहीं कांग्रेसी प्रत्याशी मोना सुस्तानी जीत के मतों को भी पार नहीं कर पाई | मतगणना के दौरान खास बात यह है कि नागर ना सिर्फ विधानसभा सारंगपुर बल्कि कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाले राघौगढ़ चाचौड़ा  खिलचीपुर से भी बड़े अंतर से जीते | रोडमल नागर को 1260930 मतों में से 8, 23, 824  मत मिले जबकि मोना सुस्तानी 3, 92, 805 पर ही सिमट गई ।  ऐसे में रोडमल नागर ने राजगढ़ में अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल करते हुए चार लाख 31 हजार 19 मतों के अंतर कांग्रेस की मोना सुस्तानी को शिकस्त दी |  राजगढ़ में रोड़मल नागर की ऐतिहासिक जीत के बाद राजगढ़ के भाजपा कार्यालय में ढोल पर कार्यकर्ता जमकर थिरके वही रात को राजगढ़ नगर में रोडमल नागर की ऐतिहासिक जीत का जश्न जमकर मनाया गया ।।

दिग्विजय को दोहरा झटका, गढ़ में भी बीजेपी की दूसरी जीत 

राजगढ़ लोकसभा सीट पर 12 मई को छठवें चरण में वोटिंग हुई थी| इस लोकसभा चुनाव में राजगढ़ सीट पर 74.32 फीसदी मतदान रिकॉर्ड किया गया, जबकि पिछली बार साल 2014 के चुनाव में यहा पर 63.38 प्रतिशत मतदान हुआ था| पिछले लोकसभा चुनाव में नागर को 5 लाख 96 हजार 727 (59.04 फीसदी) वोट मिले थे, जबकि अंलाबे नारायण को 3 लाख 67 हजार 990 (36.41 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार-जीत का अंतर 2 लाख 28 हजार 737 वोटों का था. तीसरे स्थान पर बसपा रही थी. उसको 1.37 फीसदी वोट मिले थे| राजगढ़ लोकसभा सीट राज्य की वीआईपी सीटों में से एक है| यह क्षेत्र कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विज सिंह के दबदबे वाला है|  इस सीट पर अगर किसी पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया है, तो वह कांग्रेस ही है| दिग्विजय सिंह खुद 2 बार यहां से सांसद चुने जा चुके हैं, तो वहीं उनके भाई लक्ष्मण सिंह 5 बार इस सीट से जीतकर संसद पहुंच चुके हैं| हालांकि यहां पर दोनों भाइयों को हार का भी सामना करना पड़ा है| फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है और रोडमल नागर यहां से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए हैं| भोपाल में हार के बाद दिग्विजय के लिए यह दोहरा झटका है| दिग्विजय राजगढ़ से ही टिकट चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उन्हें सबसे कठिन सीट से चुनाव लड़ने के लिए मना लिया था, जिसके बाद वे भोपाल से चुनाव लड़े और बीजेपी के अभेद किले को भेद नहीं पाए और हार का मुंह देखना पड़ा|