राजगढ़ में कलेक्टर द्वारा खेद प्रकट करने के बाद डॉक्टरों की हड़ताल खत्म

राजगढ़/मनीष सोनी

राजगढ़ (rajgarh) जिले में जिला चिकित्सालय और सभी सरकारी अस्पतालों में सोमवार शाम 4 बजे के बाद शुरू हुई डॉक्टरों (doctors) की हड़ताल (strike) खत्म हो गई है। दरअसल कलेक्टर (collector) द्वारा सिविल सर्जन और सीएमएचओ के साथ दुर्व्यवहार के तथाकथित आरोप के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी थी और कलेक्टर को हटाने की मांग कर रहे थे। द में बीजेपी के सांसद रोडमल नागर सहित स्थानीय विधायक कलेक्टर के साथ सिविल सर्जन ऑफिस पहुंचे और कलेक्टर ने इस वाकये को लेकर खेद प्रकट किया जिसके बाद हड़ताल समाप्त हो गई।

बता दें कि सोमवार को राजगढ़ (rajgarh)के कलेक्टर (collector) नीरज सिंह (neeraj singh) द्वारा मीटिंग (meeting) के नाम पर सिविल सर्जन ऑफिस (civil surgeon office) में की गई तथाकथित अभद्रता से नाराज राजगढ़ के समस्त सरकारी डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग (health department) के प्रमुख सचिव (principal secretary) को लिखे गए पत्र में डॉक्टरों ने आरोप लगाया था कि दोपहर को हुई कोरीना समीक्षा बैठक सिविल सर्जन ऑफिस में रखी गई थी और इस मीटिंग में बारी-बारी से कलेक्टर द्वारा सभी उपस्थित डॉक्टरों के साथ में अभद्र व्यवहार किया गया।

सबसे पहले एमडी मेडिसिन डॉक्टर सुधीर कलावत से बातचीत के दौरान कलेक्टर (collector) ने कहा “तुम्हें डिग्री किसने दी है। तुम्हें रेफर करने का कोई अधिकार नहीं ।”इसके बाद डॉ स्पूतनिक यदु सिविल सर्जन से कलेक्टर बोले “तेरे को नौकरी करते हुए कितने साल हो गए। मूर्ख है। तुझे कुछ नहीं आता है। तेरी प्रशासनिक व्यवस्था निकम्मी है।” कलेक्टर इसके बाद सीएमओ राजगढ से बोले ”तूने हर एक एडीएम को 20-20 पीपीई किट क्यों नहीं दी है। इसके जवाब में डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार मैंने बीएमओ पीपीई किट दे दी है ।इस पर कलेक्टर ने फिर श्रीवास्तव से कहा” मैं सभी को सस्पेंड कर दूंगा। तेरी प्रशासनिक व्यवस्था निकम्मी है। पीपी किट क्यों प्रदान नहीं करी ।”डॉक्टरों का कहना है कि कलेक्टर के इस तरह के व्यवहार से मानसिक क्षति हुई है। साथ ही साथ सभी का मनोबल टूटा है और इस घटना से जिले के सभी साथी चिकित्सकों ने पूरे जिले में कार्य नहीं करने का निर्णय लिया था।

कलेक्टर (collector) द्वारा डाक्टरों (doctors) के साथ की गई अभद्रता पर म. प्र. चिकित्सा अधिकारी संघ ने भी कड़ी निंदा करते हुए शासन (government) से दुर्व्यवहार करने वाले के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

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