लाखों खर्च कर बनाये सुलभ कॉम्प्लेक्स में लटक रहे हैं ताले, स्वच्छता अभियान को पलीता

तीन साल पहले इन शौचालय के निमार्ण में प्रति शौचालय 12 लाख 96 हजार रुपये का एक बनाया गया था । यानी की तीन शौचालयों में करीब 38 लाख 88 हजार रुपये का खर्च आया था|

राजगढ़, डेस्क रिपोर्ट| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) के राजगढ़  (Rajgarh) में प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को जिले की नगर पालिका पलीता लगाने का कार्य कर रही है । तीन साल पहले जिले के अलग अलग तहसीलों में लाखों रुपये की लागत से बनवाए गए सुलभ शौचालयो (Sulabh Sauchalaya) का बुरा हाल है । जिले भर में बने शौचालयों में ताला लटक रहा है, वही जहां इन शौचालयो को बनाया गया है उसके आसपास गंदगी का आलम है ।

तस्वीरें जिले के ख़िलचीपुर की है, जहा लाखो रुपये खर्च कर तीन शौचालय कॉम्प्लेक्स तो बनाये गए लेकिन अब ये सरकारी सुलभ शौचालय तालों की कैद में है । तीन साल पहले इन शौचालय के निमार्ण में प्रति शौचालय 12 लाख 96 हजार रुपये का एक बनाया गया था । यानी की तीन शौचालयों में करीब 38 लाख 88 हजार रुपये का खर्च आया था| ख़िलचीपुर नगर पालिका ने नई दिल्ली की लोक प्रिय सेवा संस्थान द्वारा इन सुलभ शौचालयो का निर्माण करवा गया था ,लेकिन जिस संस्था को इन शौचालयो को चलाना था वह निर्माण के बाद, उनके कर्मचारी इन सुलभ शौचालयो में ताले लगा कर चले गये| जिसकी वजह से उपयोग करने वाले लोग काफी परेशान है ओर जिसकी वजह से उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है ।

ख़िलचीपुर में बंद पड़े सुलभ शौचालय को लेकर खिलचीपुर नगर पालिका अधिकारी नरेंद्र चौरसिया से बात की तो उन्होंने बताया है कि जिस संस्थान को इन शौचालयों को चलाना था वह बिना बताए ताला लगा कर कही चले गए हैं|जिसको लेकर संस्थान को नोटिस जारी किया गया है ।

राजगढ़ जिले में नगर पालिका के द्वारा अलग अलग तहसीलों में करीब 40 से सरकारी सुलभ शौचालय बने है| लाखो रुपये खर्च करने के बाद भी इन शौचालयो में ताले लटक रहे है ,ओर ये शौचालय बंद पड़े है ,जिले के अधिकारियों की लापरवाही से अधिकांश सुलभ शौचालयों ताले में कैद है , खुले में शौचमुक्त के उद्देश्य को अधिकारी की लापरवाही के कारण पलीता लगा रहे है ।

यह था उद्देश्य
प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत योजना के तहत इन शौचालयों का निर्माण इसलिए कराया गया था कि नगर में आने वाले लोग और नगर में रहने वाले वे लोग जिनके पास शौचालय की व्यवस्था नहीं है शौच और बाथरूम के लिए खुले में न जाएं, लेकिन नगर पालिका की अनदेखी के कारण इन शौचालयों का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।