सरपंच को गधे पर बिठाकर पूरे गांव में घुमाया,शमशान में किया नृत्य,आखिर क्या है माजरा

रतलाम/सुशील खरे

रतलाम के एक गांव में मुखिया को गधे पर बैठाकर घुमाया गया। गधे पर बिठाकर उन्हें गांव की गली गली में जुलूस निकाला गया और लोगबाग साथ में ढोल ढमाके भी बजा रहे थे। लेकिन ये कोई सजा नहीं बल्कि एक मान्यता को लेकर किया गया।

आमतौर पर सजा के बतौर किसी आरोपी को गधे पर बैठाकर घुमाते तो आपने जरूर देखा होगा, लेकिन रतलाम के एक गांव में, गांव के मुखिया को ही गधे पर बैठकर घुमाया गया | गधे पर बैठने वाला भी, उस पर बैठकर ख़ुशी और मस्ती में नजर आ रहा था। पहली नजर में देखकर को कोई भी हैरत में पड़ जाए की आखिर मामला क्या है। लेकिन इसके पीछे एक पुरानी मान्यता छिपी है। दरअसल मालवा के कई गाँवों में ऐसी मान्यता है की गांव के मुखिया या उसके परिवार के सदस्य को गधे पर उल्टा बैठाकर घुमाने से इंद्र देवता प्रसन्न होते है और गाँव में जोरदार बारिश होती है। और इसी मान्यता का पालन करते हुए रतलाम के दंतोड़िया गांव के ग्रामीणों ने गांव के वसूली पटेल शांतिलाल पाटीदार को बारिश की कामना के साथ गधे पर बिठाकर पूरे गांव में घुमाया। इस दौरान गाजे बाजे और पूरे उत्साह के साथ ग्रामीणों ने यह जुलूस निकाला और  उन्हें शमशान में ले जाकर नृत्य भी करवाया | मान्यता है की ऐसा करने से रूठे इंद्र देव प्रसन्न होते है।

पूरे प्रदेश के साथ रतलाम जिले में भी मानसून की बेरुखी जारी है। ऐसे में रूठे इंद्र देव को मनाने के लिए ग्रामीण देसी टोटको का सहारा ले रहे हैं । रतलाम के गांव में अच्छी बारिश के लिए ऐसा टोटका किया, जो चर्चा का विषय बन गया। मंगलवार को गांव दन्तोडिया में लोग मेढक को लेकर घर-घर लेकर घूमे और गांव वालों ने घर पर आई मेढक का पानी डाल कर उसका स्वागत किया और कामना की है कि इन्द देव पानी बरसाये ताकी जमीन पर खड़ी फसल की प्यास बुझ सके। इसी के साथ गधे पर भी सवारी निकाली गई ताकि अच्छी बारिश हो।

ऐसा ही नजारा कुछ दिनों पहले रतलाम के करमदी गांव में भी नजर आया था जहां गामीणों ने अच्छी बारिश की कामना को लेकर भगवान् भोलेनाथ की पिंडी को पानी में डुबो दिया था। दरअसल इन दिनों बारिश की कमी से सोयाबीन और मक्के की फसलों पर कीड़े लगने लगे है  जिससे किसान मुश्किल में हैं।  किसान आसमान की और टकटकी लगाए हुए है कब बारिश होगी और कब उन्हें राहत मिलेगी । यही वजह है की लोग अब प्राचीन मान्यताओं को अपनाकर देशी टोटको का सहारा ले रहे है।