भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी पर बवाल, कांग्रेस ने पूछे सवाल

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ग्वालियर, अतुल सक्सेना।  भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले कुछ दिनों से अपने संगठन का विस्तार कर रही है। अलग अलग मोर्चों, प्रकोष्ठों की प्रदेश कार्यकारिणी गठित की जा रही है। भाजपा ने कल 22 अगस्त को अल्पसंख्यक मोर्चा (BJP Minority Morcha) के प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की है। कांग्रेस (Congress ) ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की इस कार्यकारिणी पर सवाल उठाये हैं. कांग्रेस का कहना है कि क्या इस देश में प्रदेश में केवल मुसलमान ही अल्पसंख्यक हैं ? समझा जा सकता है कि कौन सा दल मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करता है।

भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रफत वारसी ने कल 22 अगस्त को प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा की सहमति से अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की है।  घोषित सूची में 8 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री, 8 मंत्री, 1 कोषाध्यक्ष , 1 सह कोषाध्यक्ष, 1 कार्यालय मंत्री, 1 सह कार्यालय मंत्री, 1 मीडिया प्रभारी , 1 सह मीडिया प्रभारी, 1 सोशल मीडिया प्रभारी और 1 सोशल मीडिया सह प्रभारी कुल 26 लोगों को जगह दी गई है।  इस कार्यकारिणी की विशेषता ये है कि  मुसलमान सदस्यों को ही शामिल किया जबकि देश और प्रदेश में सिख, जैन, ईसाई , बौद्ध आदि भी अल्संख्यक वर्ग से आते हैं। कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल किया है।

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कांग्रेस विधायक प्रवीण पाठक (Congress MLA Praveen Pathak)  ने ट्वीट कर सवाल किया कि “समाज में वर्ग विभेद की राजनीति करके, अब क्या ज़हर पूरी तरह बोना चाहते है?? जैन, बौद्ध, ईसाई, सिख इनको क्या मानते है? ये तुष्टिकरण आखिर किस ओर इशारा है??

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उधर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह (Congress State Spokesperson RP Singh) ने एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश भाजपा की प्रदेश अल्पसंख्यक कार्यकारिणी की सूची से यह स्पष्ट होता है कि कौन सा दल मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करता है l यही भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा है जो दूसरे राजनीतिक दलों पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाते हैं और स्वयं बाकी सभी अल्पसंख्यक समुदाय को भूलकर एक ही समुदाय को अपने अल्पसंख्यक मोर्चा मैं समाहित करते हैं।”

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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