जान जोखिम में डालकर कैसे ‘स्कूल चले हम’

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सागर।

हर साल शिक्षा व्यवस्था, बच्चों की गुणवत्ता पूर्ण पढ़ाई और स्कूलों के भवनों के नाम पर मोटी रकम तो खर्च होती है लेकिन धरातल पर कोई संतोष जनक परिणाम देखने को नहीं मिलते। प्रदेश में आज भी कई जगहों में नौनिहाल क्षतिग्रस्त भवनों में बैठकर पड़ने को मजबूर हैं। हम बात कर रहें हैं मध्यप्रदेश के सागर जिले के बम्होरी बीका स्थित एक सरकारी स्कुल की, जिसे देखकर सरकार के झूठे दावों की पोल खुलती नजर आती है।

एक ओर सर्व सिक्षा अभियान जैसी योजना के माध्यम से देश में बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर पढ़ाई करने के लिए कहा जाता है तो कहीं स्कूल चलें हम जैसे अभियानों से बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक प्रथामिक विद्यालय का भवन क्षतिग्रस्त अवस्था में  संचालित हो रहा है। स्कूल की ईमारत की हालत ऐसी है कि तेज आंधी या बारिश में कभी भी ढह जाए। पड़ने आये मासूमों की जान पर हर दम खतरा मांगता रहता है। शासन-प्रशासन के गैर जिम्मेदार रवैये के कारण बच्चे जर्जर हो चुकी ईमारत में पढ़ने को मजबूर हैं।