मप्र का एक ऐसा सरकारी स्कूल जो प्राइवेट स्कूलों को दे रहा टक्कर

सागर/जैसीनगर, बृजेन्द्र रैकवार| एक ऐसा शिक्षक (Teacher) जिसके जुनून और इच्छाशक्ति से सरकारी स्कूल की कायाकल्प ही बदल दी, जिसे देखकर आप यकीन नहीं करेंगे कि यह सरकारी स्कूल (Government School) है| पेपर और टीवी चैनलों के माध्यम से आप सरकारी स्कूलों की बदतर हालातों की खबर देखते और सुनते हैं, लेकिन आज हम आपको ऐसे सरकारी स्कूलों की तस्वीर बताएंगे जिसे देखकर आप पर यकीन ही नहीं कर पाएंगे| सागर जिले की सुरखी विधानसभा अंतर्गत जैसीनगर विकासखंड के ओरिया गांव स्थित शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय एक ऐसा स्कूल बन गया है जो निजी स्कूलों को टक्कर दे रहा है|

ग्रामीण बताते हैं 2013 के पहले विद्यालय की स्थिति ठीक नहीं थी और सन 2013-14 में शिक्षक सौमित्र पांडे की पहली नियुक्ति ओरिया के माध्यमिक विद्यालय में हुई और और शिक्षक के कुछ अच्छा करने के जुनून और इच्छाशक्ति से शिक्षक ने सबसे पहले तो स्वयं के वेतन के पैसों और मित्र दृश्य शुक्ला के आर्थिक सहयोग से विद्यालय में नवाचार करना प्रारंभ किया शिक्षक के जुनून को देखते हुए धीरे-धीरे शिक्षक साथी जुड़ते गए फिर इसके बाद ग्रामीण और ग्राम पंचायत ने भी सहयोग किया और विद्यालय में क्रमश: तार फेंसिंग, विद्युत फिटिंग, कक्षाओं का अंदरूनी परिवर्तन कर पढ़ने हेतु रनिंग बोर्ड का निर्माण अंदरूनी सजावट की गई और एक स्मार्ट कक्ष का निर्माण किया गया इसके अतिरिक्त पेयजल व्यवस्था शौचालय व्यवस्था विद्यालय परिसर में वृक्षारोपण विद्यालय की बाउंड्री वॉल सहित तमाम निर्माण कार्य करवाए गए,शिक्षक के सौमित्र पांडे ने टेलीविजन की व्यवस्था भी स्कूल कक्ष में की है जिस पर बच्चों को पढ़ाई करवाई जाती है, इसके साथ ही विद्यालय के कक्षा में महापुरुषों के फोटो अच्छे पर्दे बैठने की उत्तम व्यवस्था सहित तमाम सुविधाएं शिक्षक मैं विद्यालय में उपलब्ध करवाई है जो एक इंग्लिश मीडियम विद्यालय में होती है! कोरोना काल में शिक्षक घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा भी दे रहे हैं|

ग्रामीण बताते हैं कि शिक्षक सौमित्र पांडे के आने से ही हमारे गांव के विद्यालय का कायाकल्प हुआ है व ग्रामीण शिक्षक की तारीफ करते हुए नहीं थकते हैं| ग्रामीण बताते हैं शिक्षक सौमित्र पांडे स्कूल की छुट्टी के बाद स्वयं ही गैती फावड़ा उठाकर निर्माण कार्य में मदद भी करते थे और अपना वेतन का पैसा स्कूल के नवाचार में खर्च करते हैं |

शिक्षक के जुनून को देखते ग्रामीण और ग्राम पंचायत आगे आई और सहयोग कर विद्यालय का कायाकल्प कर दिया, ग्रामीण कहते हैं कि इस तरह के शिक्षक पूरे देश के विद्यालय में हो जाए तो सरकारी विद्यालयों का कायाकल्प ही पलट जाए|

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