MP नगर निकाय चुनाव: सागर से भाजपा की महापौर प्रत्याशी बनी संगीता सुशील तिवारी, आइए जाने इनके बारे में

भाजपा ने सागर महापौर पद के लिए संगीता सुशील तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया, लेकिन अब मुकाबला भाजपा कांग्रेस का कम कांग्रेस-कांग्रेस का नजर आ रहा है।

सागर, विनोद जैन। MP Urban Body Elections:- मध्यप्रदेश नगर निकाय की तैयारी की काफी जोरों-शोरों से चल रही। सभी पार्टियां अपने-अपने प्रत्याशियों के चेहरे पर से पर्दा भी हटा रही है। भाजपा ने सागर महापौर पद के लिए संगीता सुशील तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया, लेकिन अब मुकाबला भाजपा कांग्रेस का कम कांग्रेस-कांग्रेस का नजर आ रहा है। क्योंकि महिला आरक्षित सीट होने के चलते कांग्रेस ने निधी सुनील जैन को मैदान में उतारा है, निधी जैन के पति सुनील जैन कांग्रेस से सन 1993 में सागर जिले की देवरी विधानसभा से विधायक चुने गये थे। इसी कार संगीता तिवारी के पति सुशील तिवारी भी सागर विधानसभा सीट से सन 2013 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं।

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भाजपा प्रत्याशी शैलेन्द्र जैन जो कांग्रेस प्रत्याशी निधी जैन के देवर थे। उनसे सुशील तिवारी लगभग 8000 वोटों से हारे थे। उस चुनाव में सुशील तिवारी के छोटे भाई मुकेश तिवारी, जो फिल्म अभिनेता हैं और फिल्म चाइनागेट में डाकू जगीरा के नाम से काफी प्रसिद्ध हुये थे, वह भी अपने भाई सुशील तिवारी के चुनाव प्रचार के लिए फिल्मी दुनिया छोड़कर सागर में रहे थे। लेकिन फिल्मी दुनिया का जादू भी उस समय भाजपा के सामने नहीं चल पाया और सुशील तिवारी 8000 वोटों से चुनाव हार गए। उसके बाद सुशील तिवारी ने भाजपा ज्वाइन कर ली।

MP नगर निकाय चुनाव: सागर से भाजपा की महापौर प्रत्याशी बनी संगीता सुशील तिवारी, आइए जाने इनके बारे मेंMP नगर निकाय चुनाव: सागर से भाजपा की महापौर प्रत्याशी बनी संगीता सुशील तिवारी, आइए जाने इनके बारे में

 

अब निधी सुनील जैन और संगीता सुशील तिवारी जब चुनाव मैदान में हैं, तो सोशल मीडिया में तरह-तरह की पोस्ट चल रही है। जिसमें लोग पूर्व विधायक सुनील जैन कोई काफी सरल स्वभाव वाले और व्यापारिक व्यक्ति बता रहे हैं, तो वहीं भाजपा प्रत्याशी संगीता तिवारी के पति सुशील तिवारी को लोग भू- माफिया भी बता रहे हैं। क्योंकि समय-समय पर उन पर शासकीय एवं किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने के आरोप भी लगते रहे हैं। तीन साल पहले उनपर जमीन कब्जा करने का आरोप लगा था। उनपर मौजा गाँव के अशोक नामक किसान की निजी जमीन पर कब्जा करने के आरोप थे, जिसकी शिकायत SDM तक पहुंची थी। कथित तौर पर जब अशोक ने जमीन मुक्त करने की बात कही तो नेता द्वारा उसे दबाया गया, ऐसे भी आरोप लगे थे। हालांकि जांच के बाद इसके क्या परिणाम हुए इसकी अधिक जानकारी हमारे पास नहीं है।