पाबंदी के बाद भी धड़ल्ले से चल रहा रेत उत्खनन कार्य, क्या नेताओं की है मिलीभगत? जानें पूरा मामला

मामले में जिला कलेक्टर ने बीते दिनों नदी नालों से रेत के उत्खनन को अक्टूबर माह तक के लिए बैन लगा दिया है पर रेत माफिया जिलाध्यक्ष के आदेश की अवेलना करते हुए नदियों से रेत छन्नी कर रहे हैं।

परासिया, विनय जोशी। छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हो रहे हैं। यहां जिला कलेक्टर ने रेत उत्खनन को बंद करने के आदेश दिए थे जिसकी अवेलना करते हुए रेत माफिया धड़ल्ले से रेत उत्खनन का कार्य कर रहे हैं। आरोप है की यह कार्य सफेदपोश नेताओं के द्वारा चल रहा है जिससे उनकी इस कार्य में मिलीभगत नज़र आ रही है।

ये भी देखें- नागपंचमी आज, इस तरह व्रत और पूजा करने से होंगे नाग देवता प्रसन्न

दरअसल जिला कलेक्टर ने बीते दिनों नदी-नालों से रेत के उत्खनन को अक्टूबर तक के लिए बैन लगा दिया है पर रेत माफिया जिलाध्यक्ष के आदेश की अवेलना करते हुए नदियों से रेत छन्नी कर रहे हैं। आरोप है कि परासिया विधानसभा के ग्रामपंचायत ढाला और कान्हाभैसा के बीच बहने वाली पथराई नदी का रेत माफियाओं और सफेदपोश नेताओं के द्वारा छन्नी किया जा रहा है। आज नायब तहसीलदार द्वारा नदी के पास 35 से 40 ट्राली रेत को जप्त कर कार्रवाई करते हुए पंचायत और कोटबार के सुपर्द किया गया। मामल पर कान्हाभैसा ग्रामपंचायत के पूर्व सरपंच ने बताया कि उनकी जमीन पर रेत का भंडारण किया जा रहा है। यह कार्य तय रॉयल्टी से काम हो रहा है, जबकि शासन ने अगस्त से अक्टूबर तक के लिए रेत का उत्खनन और बेचने पर पाबंदी लगाई है जिसके बावजूद सफेदपोश नेताओं के द्वारा धड़ले से काम किया जा रहा है।

ये भी देखें- किसान सम्मान निधि: 42 लाख किसानों को तगड़ा झटका, केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान

जानकारी के मुताबिक ढाला और कान्हाभैसा दो ग्रामपंचायतों के बीच बहने वाली नदी का सीना-छन्नी कर रहे रेत माफिया और सफेदपोश नेता नदी में जेसीबी का उपयोग कर उत्खनन कर रहे थे पर दोनों ग्रामपंचायतों के शासकीय सचिव कोटबार के साथ सरपंच को जानकारी होने के बाद भी उनके द्वारा उच्च अधिकारियों को जानकारी नहीं दी गई। जिससे यह महसूस हो रहा है कि कहीं न कहीं उनकी मौन स्वीकृति से काम चल रहा था।