सतना/पुष्पराज सिंह बघेल

लॉक डाउन में आम नागरिकों के सामने अर्थ संकट है और जमा पूंजी ही एक मात्र सहारा है। ऐसे में आम नागरिकों को अपने ही खाते से पैसे निकालना अब  टेढी खीर साबित हो रही है। मामला सतना जिले के रामपुर बाघेलान तहसील का है जहाँ एक दिव्यांग खाता धारक दीपक सिंह को 14 जून के दिन बहन की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी। उसे पाने के लिए वो बैंक के एक सप्ताह से चक्कर काट रहा था। बीते दिन जब फिर उसे पैसे नही मिले तो दिव्यांग दीपक और बैककर्मी के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं हुई। बैंक कर्मियों ने दीपक को पैसे देने के बजाय बद्सलूकी की और बैंक के बाहर का रास्ता दिखा दिया।

25 किलोमीटर दूर देव मऊ दलदल से आये दीपक ने इस बात की शिकायत जब रामपुर तहसीलदार, एसडीएम और लीड बैंक मैनेजर से की तब जाकर अनन फानन में उसे खाते से रकम का भुगतान किया गया। इस संबंध में बैंक के उच्च अधिकारियो ने जन धन खाता होने की दलील दी। जिससे महज 50 हजार की राशि निकालने की बात कही गयी है। साथ ही उच्च अधिकारी शाखा प्रबंधक अमित कुमार द्वारा बद्सलूकी की शिकायत मिलने पर अब जाँच की बात की जा रही है। लेकिन बडा सवाल ये है कि लॉक डाउन के बाद जहाँ हर आम आदमी आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो ऐसे में एक मात्र जमा पूंजी ही सहारा है। इस पर भी बैंक कर्मी लोगों का सहयोग नहीं कर रहे हैं और जरूरतमंदो से बदसलूकी पर उतारु है।बैंक कर्मी की बदसलूकी के शिकार अकेले दीपक सिंह नहीं हैं, बल्कि इलाके में ज्यादातर लोग मैनेजर अमित कुमार के तानाशाह रवैये से परेशान हैं।