सब्जी की खेती करने वाले किसानों की कमर टूटी, कहीं सड़ रही तो कहीं मवेशियों का चारा बनी सब्जियां

सीहोर/अनुराग शर्मा

सीहोर जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर बिजोरी गांव के अधिकांश किसान सब्जी की खेती करते हैं। बिजोरी से टमाटर, बैंगन, भिंडी आलू इंदौर और भोपाल तक जाते हैं। इस गांव में 5 एकड़ वाला किसान कम से कम 1 एकड़ में तो सब्जी उत्पादन ही करता ही है लेकिन जबसे लॉकडाउन हुआ है तब से तो किसानों की कमर ही टूट गई है।

किसानों की सब्जी की खेती करने का एक मुख्य कारण यह है कि यहां की मिट्टी काली है और पानी पर्याप्त है। कहते हैं काली मिट्टी और पानी पर्याप्त हो तो किसान का खेत सोना उगलता है। लेकिन सोना उगलने वाले खेतों से इस समय टमाटर, बेगन, सड़ने की बदबू आ रही है। लॉकडाउन के कारण किसानों का सब्जी बेचने पर भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है। इसीलिये किसानों ने सब्जी खेत में ही सड़ने को छोड़ दी है कुछ किसान सब्जी तोड़कर पशुओं को चारे के रूप में खिला रहे हैं। वहीं कुछ किसान अगली फसल के लिए खेत तैयार करने ट्रैक्टर चलवा रहे है।

बिजोरी के किसान ने बताया कि इस समय मंडी में 1 कैरेट टमाटर 35 से 50 रूपये का बिक रहा है, टमाटर तोड़कर मंडी तक पहुंचने पर इससे ज्यादा खर्चा हो जाता है गांव से सीहोर मंडी तक 1 कैरेट टमाटर का 10 रूपये से ज्यादा भाड़ा लगता है, 400 रूपये मजदूर ले लेता है ऐसे में 1 कैरेट पर 10 से 15 रूपये का नुकसान हो रहा है। किसानों की मांग है कि हमारी जो सब्जियां खराब हुई हैं उनका पटवारी द्वारा सर्वे कराकर हमें हमारी खराब हुई फसलों का दाम मिल सके, जिससे हम अपना घर चला सके जिससे जो हमारा नुकसान हुआ है उसकी कुछ भरपाई हो पाए ताकि हम अगली फसल की तैयारी करें।

 

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