घर वापसी की आस में पांव में पड़े छाले, मंजिल अब भी दूर

सीहोर। अनुराग शर्मा| Sehore News लॉक डाउन (Lockdown) के बीच अपने घर लौटने की आस में मीलों पैदल चल रहे मजदूरों (laborers) के पैरों में छाले पड़ गए हैं| भूखे प्यासे यह मजदूर आँखों में घर वापसी की उम्मीद लिए हर दर्द सह रहे हैं| एक तरफ तो केन्द्र सरकार और राज्य सरकार मजदूरों को उनके गांवों तक पहुंचाने स्पेशल ट्रेन और बसों चलाने का प्रबंध करने और उनके खाने की व्यवस्था का दावा कर रही है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh chauhan) के गृह जिले में आज भी सैकड़ों मजदूरों को अपने आशियाने तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलने को विवश होना पड़ रहा है।

सोमवार को तपती धूप में पांव में छाले हो जाने के बाद अपनी मंजिल तक पहुंचने वाले सैकड़ों मजदूरों को इंदौर-भोपाल हाईवे पर आसानी से देखा गया। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तरप्रदेश आदि के सैकड़ों मजदूर सड़क पर पैदल जा रहे थे, इन मजदूरों का कहना है कि वह लोग पैसे कमाने के लिए अपने गांवों से दूर गए थे, लेकिन लॉक डाउन के कारण अब उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई है। हमारे पैरों के छाले और पेट की भूख कोई देखने वाला नहीं है। हालकि कुछ सामाजिक संगठनों ने इनके भोजन और पानी की व्यवस्था की थी, लेकिन इन मजदूरों की दयनीय स्थिति देखकर आंखों से आंसू आ रहे है।

सिर पर पोटली रखकर पैदल चलने को विवश मजदूर
मजदूरों को देश की मजबूत रीढ़ की हड्डी कहा जाता है, लेकिन इन मजदूरों को देखने वाला और इनके दुखों का समाधान करने वाला कोई नहीं है। सागर निवासी राम चरण का कहना है कि वह सैकड़ों किलोमीटर दूर पैदल ही अपने क्षेत्र में जाना चाहता हूं। मुझसे एक ट्रक ड्राइवर ने पैसे ले लिए है, लेकिन थोड़ी दूर छोड़कर चला गया। इस तरह की पीढ़ा इन मजदूरों के चेहरे से साफ झलक रही है। यह मजदूर सिर पर पोटली रखकर पैदल चलने को विवश है।

घर वापसी की आस में पांव में पड़े छाले, मंजिल अब भी दूर घर वापसी की आस में पांव में पड़े छाले, मंजिल अब भी दूर