क्या पीएम मोदी लॉकडाउन की घोषणा करते वक्त भूख से परेशान ग़रीबों और दिहाड़ी मज़दूरों को भूल गए?

सीहोर। अनुराग शर्मा।

जानलेवा कोरोना वायरस की चपेट में आज पूरा विश्व है और इसने भारत में भी अपने पैर पसार लिए हैं। आज हर एक व्यक्ति डरा हुआ है उसे कुछ नहीं पता आखिर क्या होने वाला है। बीते कुछ दिनों में हम किन किन व्यक्तियों से मिले शायद हमें भी याद नहीं। कौन संक्रमित था। यह हमें नहीं पता। खैर हमें अपने घरों में रहना है और पूरी तरह सकारात्मक रहना है।

जानलेवा कोरोना वायरस ने अनेक देशों को अपने चपेट में लिया है। यह  महामारी हजारों जिंदगीयां लील चुकी हैं और लाखों इससे संक्रमित हैं। चीन से कब दबे पावं भारत में यह पहुंची किसी को नहीं पता। 24 मार्च रात 8 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश ने नाम अपने संबोधन में कहा कि आज कोराना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए आज रात 12 बजे से पूरा देश 21 दिन के लिए लॉक डाउन किया जा रहा है। संपूर्ण बंद। आप अपने घरों में रहें। सोशल डिस्टेंस बना कर रखे। यह एक प्रकार का कर्फ्यू ही है। मोदी जी के इस फैसले से पूरा देश सहमत है। क्योंकि इसके अलावा कोई दूसरा उपाय भी तो नहीं। जान है तो जहान है। इस वक्त राष्ट्रवाद की परिभाषा यही है कि अपने अपने घरों में रहें।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से कहा कि अपने अपने घरों में रहे परंतु शायद ऐसे बोलते वक्त वह यह भूल गए कि इस देश में कई लोगों के अपने घर ही नहीं है। दिहाडी मज़दूर जो रोज़ी-रोटी की तलाश में अपने घरों से कइयों मील दूर अन्य राज्य, अन्य शहरों में पड़े हैं। जिनके पास कोई जमा पूँजी नहीं होती। खाने के लिए रोटी नहीं होती। रहने को घर नहीं होता। वह आज किन हालातों में हैं। शायद सरकार ने यह जानने की कोशिश भी नहीं की होगी।

शहरों में दिहाडी मज़दूर जिनके पास आज खाने को रोटी नहीं, रहने को घर नहीं। ऐसे मज़दूरों के परिवार भय और भूख से तड़प रहे हैं।संपूर्ण भारत बंद में बस, ट्रेन व अन्य यातायात के साधन पूरी बंद बंद हैं तो वह अपने घर भी नहीं जा सकते। आज भी इस देश की बड़ी आबादी मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती है। जिनके पास कोई जमा पूँजी नहीं होती, कोई बैंक खाता नहीं होता।

दिहाडी मज़दूरों के पास आज अपने घर जाने तक के लिए पैसा नहीं, यह लोग कइयों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घर जा रहे हैं। सरकार विदेशों में रहने वालों को एयर लिफ्ट करके अपने वतन ला रही है लेकिन सरकार को अपने देश के मज़दूरों का ख्याल नहीं आया कि बिना पैसा, बिना रसद के वह 21 दिन कैसे बिताएंगे।

मोदी के फैसले पर आलोचना करने वाले को राष्ट्रदोही कह दिया जाता है लेकिन सच तो यह है संपूर्ण लॉकडाउन करने से पहले सरकार ने ग़रीब और मज़दूर की एक बार भी नहीं सोची। चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस की ख़बरें बीते दिन माह से लगातार मिल रही थी तो। पूर्ण बहुमत वाले मजबूत मोदी सरकार क्यो सजग नहीं हुई?