कोरोना संकट : अनुष्ठान मान संक्रमित शवों को दे रहे अग्नि, एक साल से घर में नहीं रखा कदम

सीहोर जिले में कोरोना संकट के बीच घनश्याम सिंह चौहान अनुष्ठान मान कर संक्रमित शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने एक साल से अपने घर में कदम तक नहीं रखा है।

सीहोर, अनुराग शर्मा। सीहोर नगरपालिका में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चौकीदार के पद पर पदस्थ घनश्याम सिंह चौहान रोज कोरोना (Covid-19) संक्रमितों के शव को उठा रहे हैं। महज 14 हजार रु की तनख्वाह पर काम करने वाले घनश्याम बीते कोरोना संकट के चलते एक साल से अपने घर के अंदर नहीं घुसा है, शमशान से रात को जब घर पहुंचता है तो वह पत्नी और बच्चे बाहर ही खाना दे देते हैं। घनश्याम चौहान का कहना है कि यह काम उनके लिए नौकरी नहीं बल्कि सेवा है।

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घनश्याम सिंह चौहान रोजाना छावनी श्मशान घाट में 24 घटें की ड्यूटी कर कोरोना संक्रमित शवों का अतिंम संस्कार कर रहे हैं। एक दिन में आठ-दस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। तो वहीं अधिकांश समय संक्रमित शवों के बीच रहने के बाद भी खुद को सुरक्षित रखे हुए हैं। चौहान कहते हैं कि कोरोना से मौत के बाद जिस शव के पास परिजन नहीं जा पाते हैं, उन्हें वह अग्नि प्रदान करते हैं। यह किसी धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं है। अभी संकट की घड़ी है घर परिवार से ज्यादा फर्ज जरूरी है। जिसे मैं बखूबी निभाने की कोशिश कर रहा हूं। घनश्याम बताते हैं 1 साल में 300 शव का अंतिम संस्कार किया है। वर्तमान में रोजाना श्मशान में आठ से दस शव आते हैं, इनमें कई कोरोना संक्रमित भी रहते हैं।