ज़हरीले धुएं में सांस लेने को मजबूर यहां के रहवासी, बेखबर प्रशासन

सीहोर। अनुराग शर्मा।

हर कोई स्वच्छ हवादार वातावरण में जीना चाहता है, लेकिन शहर के देवनगर कालोनी, ब्रह्मपुरी कालोनी  और इंद्रानगर सहित आसपास के क्षेत्रों के रहवासी कई दिनों से विषाक्त धुएं को सहन कर रहे हैं और बीमार हो रहे हैं. जिम्मेदारों की अनेकानेक ड्योढ़ी पर जाकर लोगों ने इस जहरीले धुएं से छुटकारा दिलाने की मांग की गई, लेकिन बेबसों की फरियाद नक्कारखाने में तूती साबित हुई. 

शहर भर से निकलने वाले कचरे को नगरपालिका द्वारा हाईवे स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में फैंका जाता है. औसतन प्रतिदिन 45 टन कचरे को यहां पनाह मिलती है, लेकिन इसके निष्पादन में बरती जा रही लापरवाही लोगों की सेहत पर भारी साबित हो रही है.

पर्यावरण को बचाने में यहां क्यों नहीं गंभीर

देश की राजधानी नई दिल्ली में पड़ोसी राज्य हरियाणा और पंजाब में जलाई जा रही पराली के धुएं को लेकर काफी हो हल्ला मचाया जा रहा है. धुएं के कारण दिल्लीवासियों को होने वाली तकलीफों का बखान रोजाना प्रत्येक न्यूज चैनल और अखबारों में किया जा रहा है, लेकिन क्या हमारे शहर सीहोर के गरीब और निम्र तबके को स्वच्छ माहौल में रहने का कोई हक नहीं है जो उनकी सांसों को जहरीले धुएं से असमय कम किया जा रहा है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि हरियाणा और पंजाब में साल में दो बार पराली जलाई जाती है और साल में एक बार दीवाली पर पटाखे फोड़े जाते हैं, लेकिन इस दौरान सख्ती बरती जाती है, जबकि ब्रह्मपुरी कालोनी, देवनगर और आसपास के अन्य क्षेत्रों के लोग कई महीनों से 24 घंटे सतत जहरीला धुआं झेल रहे हैं तो उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं. 

कचरे में अक्सर लग जाती है आग

नगरपालिका द्वारा शहर भर से एकत्रित कर लाए जाने वाले कचरे के यहां कई ढेर लगे हुए हैं. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यहां आए दिन कचरे के ढेर सुलग उठते हैं और इनसे उड़ता धुआं आसपास की बस्तियों पर छाया रहता है. ऐसे में जब हवा की रफ्तार काफी कम रहती है तब यह धुआं रहवासियों को इतना बेचैन कर देता है कि उनका अपने ही घरों में रहना भी मुहाल हो जाता है. दरवाजों को बंद रखने के बाद भी उन्हें धुएं की घुटन से आजादी नहीं मिल पाती. 

हम गरीब हैं, इसलिए नहीं सुनते फरियाद

वार्ड क्रमांक दो के अनेक रहवासियों ने बताया कि इंद्रानगर में ज्यादातर गरीब व निम्र तबके के लोग निवास करते हैं. यह क्षेत्र गंदी बस्ती की श्रेणी में आता है, इसलिए हमारी समस्या व शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता है. जबकि ट्रेचिंग ग्राउंड में पड़े कचरे में 90 प्रतिशत कचरा प्लास्टिक होता है, जिसके जलने से उठता विषाक्त धुआं लोगों को असाध्य बीमारियों का तोहफा प्रदान कर रहा है. 

सभी जगह कर चुके शिकायत 

इन गरीबों की बातों में सत्यता भी नजर आती है, क्योंकि इन्होंने स्वच्छ वातावरण और साफ हवा पाने की आस में सरकारी महकमे के हर जिम्मेदार अधिकारी के दफ्तर के अनेक चक्कर काट डाले हैं. इतना ही नहीं नपा के जिम्मेदारों को अनेकानेक बार शिकायत की गई है. इसे यहां के रहवासियों की विडम्बना ही माना जाएगा कि उन्होंने सीएम हैल्पलाईन पर भी शिकायत की थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई निराकरण न करते हुए सीएम हैल्पलाईन को भी गलत जानकारी देकर शिकायत को बंद करा दिया. रहवासियों की मानें तो उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार पैसे खर्च कर ईमेल के माध्यम से शिकायत की पर जब बोर्ड के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रैंगी तो उन्होंने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शरण ली. वहां से उनकी शिकायत को वापस राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास भेज दिया गया और हर बार की तरह उनकी यह शिकायत भी निराकरण की आस में दम तोड़ गई. इसके अलावा जिला प्रशासन के पास भी अमूमन हर जनसुनवाई में फरियाद लेकर पहुंचे इन लोगों को न्याय नहीं मिल पाया है. ऐसे में उनके पास जहरीले धुएं का सामना करते हुए तड़प- तड़पकर बीमार होने के अलावा कोई और चारा नहीं है.

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