पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन की अनोखी पहल, चरवाहों को बनाया वन मित्र

सिवनी। सिवनी में पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा वन्य जीवों की सुरक्षा और वन अपराध पर नियंत्रण रखने के लिए एक नया कदम उठाया है, जो पेंच प्रबंधन के सूचना तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। इस प्लान के तहत जंगल के चरवाहे अब जंगल के नये सिपाही के रूप मे तैयार हो रहे है। पेंच प्रबंधन ने जंगल में अपने मवेशीयों को चराने वाले चरवाहों को अपने सूचना तंत्र से जोडऩा शुरू किया है। पेंच प्रबंधन के इस कारगर कदम से न केवल सूचना तंत्र मजबूत हो रहा है बल्कि प्रबंधन को कई तरह के महत्वपूर्ण फायदे हो रहे है।  

पेंच प्रबंधन ने बतौर वन मित्र के रूप में चरवाहों को अपने सूचना तंत्र में गोपनीय रूप से शामिल किया है। यही नही जो भी चरवाहा प्रबंधन को किसी भी प्रकार की सूचना देता है उसकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाती है। प्रबंधन का मानना है कि जंगल मे होने वाली हर घटना और अपराध की सूचना सबसे पहले जंगल के चरवाहों के पास ही पहुंचती है। चाहे वह किसी बाघ का मूवमेंट हो या बाघिन द्वारा शावक को जन्म देने की सूचना, किसी तरह की दुर्घटना या फिर किसी वन्य जीव का शिकार। शिकारियों को पकडऩे के तमाम मामलों के खुलासा करने में चरवाहों की अहम भूमिका रहती है। इसलिए प्रबंधन ने चरवाहों को अपने सूचना तंत्र में प्रमुखता से शामिल किया है। 

यही नही चरवाहों से प्रबंधन को पहले से सचेत करने वाली सूचनायें भी मिलती है। ऐसी सूचनाओं से घटित होने वाली दुर्घटनाओं और अपराध को पहले से रोके जाने में आसानी होती है। प्रबंधन का यह भी कहना है वर्तमान में बफर जोन अंतर्गत आने वाले गांव के करीब दो सौ चरवाहों को इस प्लान से जोड़ा गया है। इन चरवाहों को कुछ बेसिक ट्रेनिंग दी गई है। ट्रेनिग के बाद यह चरवाहों से सीधे पेंच प्रबन्धन के अधिकारीयों को घटना की सटीक इन्फर्मेशन मिल रही है। जिसके कारण प्रबन्धन को सूचना पर तत्काल एक्शन लेने में आसानी हो रही है। इस प्लान के बाद चरवाहे जंगल के नये सिपाही साबित हो रहे है। यही नहीं प्रबन्धन के सूचना तंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले चरवाहों का ध्यान पेंच प्रबन्धन बखूबी रख रहा है। उनको जरूरी सामान मुहैया कराने के साथ साथ इन चरवाहों और उनके बच्चों के विकास के लिए स्किल डेवलपमेंट जैसी कई योजनाओं से जोडऩे की जिम्मेदारी पेंच प्रबंधन द्वारा उठाई जा रही है।