श्रीदेवी के ‘पति’ ने पुण्यतिथि पर गांव में किया मृत्युभोज, 11 महीने तक कराया कन्याभोज

श्योपुर, डेस्क रिपोर्ट। आपने ये कहावत तो जरूर सुनी होगी की ,जो दीवाने होते है वो किसी भी हद तक जा सकते हैं। एक ऐसा ही दीवानेपन का नजारा श्योपुर (sheopur) जिले के ददुनि (daduni) गांव में देखने को मिला। दिवंगत फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी (sridevi) को अपनी पत्नी मानकर जीवन जी रहे ओ.पी. मेहरा ने उनकी तस्वीर से ही शादी करली। वही श्रीदेवी की मौत की खबर सुनने के बाद पूरे विधि-विधान से एक पति की तरह उनहोने श्रीदेवी का अंतिम संस्कार किया।

24 फरवरी 2018 के ही दिन बॉलीवुड (bollywood)और इस दुनिया को श्रीदेवी ने हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था। श्रीदेवी की 3 बरसी पर जहां उनके परिवार और सभी ने श्रद्धांजलि (tribute) दी। तो वहीं देश में श्रीदेवी के चाहने वालों ने उन्हें याद किया। ऐसे ही एक और दीवाने और प्रशंसक ओ.पी. मेहरा ने तो अपने गांव में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। बता दें की ओपी मेहरा श्रीदेवी के इतने बड़े फैन है की उन्होने श्रीदेवी को ही अपनी पत्नी मान लिया और उनकी तस्वीर से ही शादी रचा ली। उसके बाद ओपी मेहरा ने कभी शादी नहीं की बल्कि उसी तस्वीर के सहारे पूरा जीवन व्यतीत कर रहे है। बता दें की फिल्मसिटी कि मशहूर अभिनेत्री दिवंगत श्रीदेवी की पुण्यतिथि ओ.पी. मेहरा द्वारा हर साल अब इस गांव में मनाई जाती है। और पूरे गांव को निमंत्रण देकर भोज करवाया जाता है। एवं श्रद्धांजली सभा का भी आयोजन किया जाता है। वहीं इस भोज और श्रद्धांजली सभा में पूरा गांव एकत्रित होता है। और लोगों द्वारा श्रधांजलि सभा मे श्रीदेवी की तस्वीर पर फुलमाला चढ़ाई जाती है। एवं मौन धारण भी किया जाता है। दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को अपनी पत्नि मानने वाले ओ.पी. मेहरा ददुनी गांव में रहते है जो श्योपुर जिले से मात्र 9 किलोमीटरदूर है। ओपी मेहरा श्रीदेवी के इतने दिवाने है कि श्रीदेवी की मौत पर उन्होने वही सब संस्कार किए थे जो व्यक्ति अपनी पत्नी के मरने के बाद करता है और मुण्डन कराकर शोक सभा भी कि थी।

ओ.पी. मेहरा का कहना है कि इनसे (श्रीदेवी) से बहुत प्रेम करता था। और इतना प्रेम करने लग गया कि, इनकों अपनी पत्नि के रूप में मानने लग गया उसी दिन से, और जब 24 फरवरी 2018 को श्रीदेवी की मृत्यु हुई थी ,तो तब से मुझे इतना दुख हुआ और उनके मरने के बाद मैंने सारे हिन्दु रिती-रिवाज के अनुसार श्रद्धांजली देने के बाद तेरहवीं में मैंने 151 कन्याओं का कन्याभोज कराया था। साथ ही श्रद्धांजली देने के बाद 11 महीने का भोजन भी करवाया और उनका कहना है की जब तक जिन्दा हूं तब तक उनकों अपनी पत्नि ही मानता रहूंगा।