शिवपुरी पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई पर BJP नेता बोले- “पुलिस मुझ पर करे FIR”

शिवपुरी, मोनू प्रधान। शिवपुरी नगर में अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का मामला गरमा गया है। दरअसल अग्रसेन जयंती पर निकल रहे जुलूस को पहले अनुमति दी गई और उसके बाद अनुमति निरस्त कर समाज के पदाधिकारियों पर FIR दर्ज कर दी गई। बीजेपी ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया है।

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वाकई MP गजब है..यहां अधिकारी कभी-कभी ऐसी कार्रवाई कर जाते हैं जो समझ से परे होती है। ऐसा ही वाकया शिवपुरी नगर में हुआ। मध्य प्रदेश अग्रवाल समाज शिवपुरी इकाई द्वारा 4 अक्टूबर को शिवपुरी के एसडीएम को 7 अक्टूबर को अग्रसेन जयंती पर प्रभात फेरी व चल समारोह निकालने की अनुमति मांगी गई। अनुमति विभिन्न चरणों से होकर गुजरी और पुलिस ने भी इस पर सहमति प्रदान कर दी। उसके बाद एसडीएम साहब ने भी इस प्रभात फेरी और चल समारोह को निकालने की अनुमति दे दी। 7 अक्टूबर को जैसे ही प्रभात फेरी शुरू हुई, मौके पर टीआई साहब पहुंच गए और अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों से कहा कि यह अनुमति अब निरस्त कर दी गई है। हालांकि इसकी भी एक अलग प्रक्रिया है और 24 घंटे पहले निरस्ती की जानकारी देना जरूरी है। लेकिन प्रभात फेरी तो निकल चुकी थी जिसमें 100 लोग उपस्थित होने की स्वीकृति के उलट मात्र 40 लोग मौजूद थे जो खत्म होते-होते आठ रह गए। लेकिन प्रशासन तो प्रशासन है। टीआई साहब ने 4 लोगों पर  FIR दर्ज कर दी जो अग्रवाल समाज के पदाधिकारी हैं और इन पर आरोप लगाया कि कोविड-19 प्रोटीकॉल का उल्लंघन हुआ है। बिना अनुमति के जुलूस निकाला गया है।

पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से अग्रवाल समाज में भारी रोष है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस कार्रवाई को नहीं रोका गया तो व्यापक आंदोलन होगा। प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र शर्मा ने भी मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर अग्रवाल समाज के पदाधिकारियों पर 188 के तहत प्रकरण दर्ज करने को गलत बताया है और इस कार्रवाई को वापस लेने की मांग की है। इतना ही नहीं, सुरेंद्र शर्मा ने तो साफ तौर पर कह दिया है कि अग्रवाल समाज शिवपुरी के साथ मेरा पूरा समर्थन है। टीआई चाहें तो एफआईआर में मेरा नाम भी जोड़ दें।

हैरत की बात यह है कि अक्टूबर के माह में ही विभिन्न आयोजन हुए जिसमें नव दुर्गा की स्थापना, चेहल्लुम का जुलूस जैसे कार्यक्रम थे, जिनमें व्यापक भीड़ रही। लेकिन इन पर पुलिस प्रशासन की नजर नहीं गई। इससे भी ज्यादा हैरत की बात यह कि खुद शिवपुरी का प्रशासन एक गरबे का आयोजन करा रहा है जिसकी अनुमति दी गई है। फिर आखिर अग्रवाल समाज का कसूर क्या है!