शिवपुरी- कोरोना ICU वार्ड में आग लगी, एक मरीज की मौत

वेंटिलेट में शार्ट सर्किट से लगी आग

शिवपुरी, मोनू प्रधान। जिला अस्पताल के कोरोना आईसीयू वार्ड में आग लग गई। इस हादसे में एक कोरोना संक्रमित मरीज की मौत हो गई। इस वार्ड में पांच गंभीर संक्रमित मरीज भर्ती थे। कहा जा रहा है कि वेंटिलेटर में शार्ट सर्किट आग लगी है।

जानकारी के मुताबिक मरने वाले मरीज का नाम मोहम्मद इल्लाम (उम्र 55) है जिन्हें आठ दिन पहले सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। गुना के रहने वाले मोहम्मद इल्लाम को जांच के बाद शिवपुरी मेडीकल कॉलेज रेफर किया गया था। यहां उन्हें जिला चिकित्सालय के आईसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया। आज अचानक वेंटिलेटर में शॉर्ट सक्रिट से आग लग गई और इसके बाद अस्पताल में अफरातफरी मच गई। इसके बाद मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जाने लगा। जानकारी के अनुसार इसी शिफ्टिंग के दौरान मोहम्मद इल्लाम को ऑक्सीजन नहीं मिल पाया और ऑक्सीजन की कमी के चलते उनकी मौत हो गई।

मामले की सूचना सीएमएचओ को लगी तो वो मौके पर पहुंचे, लेकिन हादसे में किसी के हताहत होने की बात से वो साफ इंकार करते नजर आए। सीएमएचओ डॉ ए एल शर्मा ने कहा कि अस्पताल में छोटा सा हादसा हुआ है और इसके बाद सभी मरीजों को सुरक्षित दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। सभी मरीज सुरक्षित हैं और घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। बता दें कि शिवपुरी सीएमएचओ पर इससे पहले भी मौत के सही आंकड़े छिपाने के आरोप लगते रहे हैं और इस घटना के बाद भी वो किसी की मृत्यु से इनकार कर रहे हैं। लेकिन मृतक के बेटे मोहम्मद ताहिर का कहना है कि उनके पिता की मौत शिफ्टिंग के दौरान ऑक्सीजन न मिलने से ही हुई है।

सवाल इसपर भी खड़े हो रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस प्रशासन की मदद से मृतक की बॉडी को आनन फानन में परिजनों को देकर घर भेज दिया, कहा जा रहा है कि परिजनों को इसके लिए लालच भी दिया गया था। जबकि ये पुलिस की जिम्मेदारी है कि मृतक का पोस्टमार्टम कराया जाए क्योंकि बगैर पोस्टमार्टम यह साबित नहीं हो सकता कि मृतक की मृत्यु आग लगने से, धुंआ श्वास नली में जाने से या ऑक्सीजन की कमी के कारण से हुई है। लेकिन यहां तो पुलिस प्रशासन ही मामला रफा दफा करने में जुटा रहा। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि आईसीयू में कुछ दिनों से लाइट प्वाइंट में स्पार्किंग हो रही थी, जिसे ठीक करने के लिए संबंधितों द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ए एल शर्मा को अवगत कराया गया था। लेकिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा इसे गम्भीरता से नहीं लिया गया और उसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया।