शर्मनाक: प्रदेश का मॉडल प्रसव केंद्र, जहां मोबाइल की रोशनी में हो रही डिलीवरी

शिवपुरी,डेस्क रिपोर्ट। आज़ादी की 75 वीं वर्षगांठ और विकास की बात तो चलिए चलते है, मध्यप्रदेश के शिवपुरी के झिरी ग्राम में। शिवपुरी के ग्राम झिरी में प्रदेश का मॉडल प्रसव केंद्र बनाया गया है। और आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले आठ दिनों से इस प्रसव केंद्र में मोबाइल की रोशनी में प्रसव करवाया जा रहा है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बेहतर है,यह एक उदाहरण है।

प्रदेश के मॉडल प्रसव केन्द्र में एक महिला की मोबाइल फोन की टार्च जलाकर डिलीवरी करवाई गई, शिवपुरी के ग्राम झिरी स्थित इस प्रसव केन्द्र में आठ दिन से बिजली नहीं है, खास बात तो यह है कि पूरे मामले में अधिकारियों की मानें तो उन्हें कोई जानकारी नहीं है। शिवपुरी के ग्राम भदरौनी में रहने वाली आनंदराव की पत्नी अनारकली उम्र 25 वर्ष को जब प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे लेकर ग्राम झिरी स्थित प्रसव केन्द्र पहुँचे, यहां आकर उन्हें पता चला कि इस मॉडल प्रसव केंद्र में तो लाइट पिछले 8 दिन से नही है, प्रसव केंद्र में मौजूद स्टाफ ने अनारकली को 20 किलोमीटर दूर शिवपुरी ले जाने की सलाह दी। लेकिन परिजनों ने कच्चे व पथरीले रास्ते के डर से इसी प्रसव केन्द्र में ही डिलिवरी कराने का निर्णय लिया, इधर महिला की हालत भी बिगड़ती जा रही थी, जिसे देखते हुए डाक्टर सहित अन्य महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने मोबाइल फोन व मोमबत्ती की रोशनी में महिला की डिलेवरी कराई, हालांकि सब कुछ ठीक रहा महिला ने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया।

गौरतलब है कि करीब पांच वर्ष पहले अस्पताल को अंधेरे से दूर रखने के लिए प्रसव केन्द्र सोलर लाइट लगाई गई थी, जिससे कुछ दिन तो यहां पर रोशनी रही लेकिन बाद में सोलर लाइट ही चोरी चली गई, जिम्मेदारों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पिछले आठ दिन से स्वास्थ्य केन्द्र में लाइट नहीं है, यहां पर भर्ती महिलाएं और उनके नवजात अंधेरे में पड़े है, गर्मी से परेशान हो रहे, मच्छरों की भरमार है।

झिरी प्रसव केन्द्र पर शिवपुरी के 25 गांव की 50 हजार से ज्यादा की आबादी निर्भर है, जिसे देखते हुए इस मॉडल प्रसव केन्द्र के रुप में विकसित करने के लिए  लाखों रुपए खर्च किए गए, उद्देश्य तो यही था कि मृत्यु दर में कमी लाना था, इसके लिए जोरशोर से प्रचार व प्रसार किया गया, यहां तक कि देश-विदेश की संस्थाओं ने यहां की व्यवस्थाओं को देखा था, शासन द्वारा यहां पर हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई, ट्रेड स्टाफ तक रखा गया, इसके बाद आज हालात ये है कि आठ दिन से लाइट नहीं है और जिम्मेदारों को पता नहीं है, मोबाइल फोन की रोशनी में डिलिवरी कराई जा रही है। और जिम्मेदार कहते है कि उन्हें जानकारी नही।