स्कूल के पास धड़ल्ले से बिक रही शराब, देर रात तक लगता है शराबियों का जमावड़ा

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स्कूल के पास धड़ल्ले से बिक रही शराब 

आबकारी विभाग की मिलीभगत से रात के 12 बजे तक खुला रहती है देशी शराब दुकान

देखकर भी प्रशासन अनजान, लोगों में आक्रोश  


सिंगरौली//राघवेन्द्र सिंह|

सिंगरौली के खुटार में प्रशासन की नांक के नीचे नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है|  मंदिर, स्कूल और हॉस्टिपटल के प्रतिबंधित दायरे में शराब दुकानें नहीं होनी चाहिए| लेकिन यहां स्कूलों के पास धड़ल्ले से शराब परोसी जाती है और पूरे समय शराबियों का मजमा लगा रहता है जिससे स्थानियों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, बल्कि स्कूल जाने वाली बच्चियां भी डर के साये में रहती हैं| 

बता दे कि शराब दुकान मुख्य सड़क से 500 मीटर की दूरी पर होना चाहिए लेकिन सिंगरौली जिले के खुटार में देशी शराब दुकान के महज कुछ दूरी पर कन्या विद्यालय सहित आधा दर्जन के लगभग विद्यालय संचालित है | वही पास में हनुमान मंदिर हॉस्पिटल व ग्राम पंचायत भी स्थित है | इतना ही नही देशी शराब दुकान मेन सड़क के किनारे स्थित होने के कारण शराबियो का दिन भर जमघट लगा रहता है | वही शराब दुकान के बगल में आहाता भी खोल कर शराब पिलाने का काम किया जा रहा है तो कुछ लोग शराब दुकान के पास ही बैठकर शराब पीने लगते है और शराब दुकान मेन सड़क के किनारे होने के कारण नशेड़ी लोग अपनी गाडियो को वही सड़क पर खड़ा कर देते है जिससे रोजाना घंटो जाम लगा रहता है|  अगर कोई गाड़ी हटाने को बोलता है तो नशे की हालत में मस्त हुए लोग लड़ाई झगड़ा और गाली गलौज पर उतारू हो जाते है | सबसे चौका देने वाली बात तो ये है कि शराब दुकान के बगल में किराना दुकान है जहाँ एक फैमिली परिवार निवास करता है वही दूसरी तरह होटल भी है लेकिन शराब के नशे में लोग अक्सर अश्लील गालिया बकते नजर आते है| 

शराब दुकान को हटवाने के लिए ग्रामीणों ने कई बार जिला प्रशासन से निवेदन किया लेकिन आज तक शराब दुकान खुटार में मेन सड़क के किनारे जहा लोग परिवार सहित निवास करते है आस पास विद्यालय, अस्पताल व मंदिर तक स्थित है लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई| वही सूत्रों की माने तो आबकारी विभाग की मिलीभगत से खुटार देशी शराब दुकान के द्वारा आस पास के गांव में धड़ल्ले से कुचिया शराब की बिक्री की जाती है|  ग्रामीणों के कई बार विरोध किये जाने के बाद भी प्रशासन की आँख नहीं खुली, प्रशासन के नांक के नीचे नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही है और जिम्मेदार खामोश है, जिससे लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है|