संयुक्त मोर्चा सामाजिक संगठनों ने एनआरसी के विरोध में किया प्रदर्शन

सिंगरौली। राघवैंद्र सिंह। 

संयुक्त मोर्चा समाजिक संगठन के तत्वाधान में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विशाल आंदोलन कर कलेक्टर सिंगरौली को महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा अपने ज्ञापन पर संयुक्त मोर्चा में उल्लेख किया कि वह                                    

 इसी शीतकालीन सत्र में लोकसभा एवं राज्यसभा, दोनों सदनों में पारित होने के उपरान्त महामहिम के द्वारा संतुष्टि मिलने के पश्चात कानून बन गया है, जबकि इस कानून के सम्बन्ध में कई महत्वपूर्ण संविधान विद् एवं पूर्व न्यायाधीष तथा बहुतायत प्रबुद्ध गणमान्य नागरिकों का मानना है कि यह कानून लोकतांत्रिक गणराज्य की अवधारणाओं के विरूद्ध होकर असंवैधानिक है और देष की एकता एवं अखण्डता के लिए घातक है। यह कानून लोकहित में न होकर विघटनकारी है एवं धार्मिक द्वेष भावना से प्रेरित है, जिससे धर्मनिरपेक्षता तथा समानता, संप्रभुता जैसे मौलिक अधिकारों का हनन् हो रहा है। इस कानून से धार्मिक रूप से भारतीय अल्प संख्यक मुस्लिम वर्ग एवं अनुसूचित जाति /जनजाति तथा अन्य कमजोर वर्गोंे के लोगों को प्रताड़ित होने की संभावना है। यह धार्मिक तुष्टिकरण द्वारा मताधिकार का ध्रुवीकरण करने मात्र के लिए लाया जाना प्रतीत होता है। वैसे भी अंतर्राष्ट्रीय संधी के अनुसार किसी भी व्यक्ति को आश्रय या नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। अतः हम कुछ तथ्य आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं, जो निम्नलिखित है:-

1. यह कि नागरिकता संषोधन कानून 2019 में धार्मिक आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान है, जो कि संविधान के मूल भावना के विरूद्ध है और मौलिक अधिकारों का हनन् है तथा संविधान की अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

2. यह कि नागरिकता संषोधन कानून 2019 में केवल पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेष के शरणार्थियों में इस्लाम धर्म को छोड़कर अन्य धर्मों के अल्प संख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है, जो साम्प्रदायिक भेदभाव पूर्ण है और भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के विरूद्ध है।

3. यह कि नागरिकता संषोधन कानून 2019 में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है, जिससे विदेषी नागरिकों, शरणार्थियों की पहचान की जा सके। असम का अनुभव हमें बताता है कि जो अपने नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण-पत्र नहीं दे सकता, वह विदेषी है। इससे कई तरह के सवाल उठते हैं, जो इस प्रकार हैं:- 

(अ) यह कि भारत में कई घुमक्कड़ जातियां हैं, जिनका कोई स्थायी निवास नहंी होता है। वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पायेंगे। 

(ब) यह कि बहुत से गरीब व अति पिछड़ा वर्ग के लोग बंटाई की जमीन पर खेती कर रहे हैं और दूसरे व्यक्ति के जमीन पर अपना झोपड़ी बनाकर रह रहें हैं, जिसका दस्तावेज उनके पास नहीं है और इस तरह देष के करोड़ों लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पायेंगे।

(स) यह कि सभी वर्ग, धर्म व जाति के गरीब, मजदूर, अषिक्षित लोग प्राकृतिक व अन्य आपदाओं में अपना सबकुछ खो चुके हैं, ऐसे परिवारों के लोगों को अपनी नागरिकता साबित कर पाना लगभग असंभव होगा। चूंकि इस्लाम धर्म के अनुयायी मुस्लिम समाज और अनुसूचित जाति /जनजाति के लोग अधिक अषिक्षित और अति गरीब हैं, इसलिए यह समाज अधिक प्रभावित होगा और अपने ही देष में उत्पीड़न का षिकार होगा। यह मानवता और संविधान के विरूद्ध है। 

(द) यह कि महिलाओं की पहचान हमारे देष में बड़ा मुद्दा है। उनके दस्तावेजी प्रमाण सबसे कमजोर रहते हैं, जिस कारण असम में बड़ी संख्या महिलाओं की है, जिन्हें भारत का नागरिक नहीं माना जा रहा है, जो मानवीय मूल्यों के विपरीत है।

4. यह कि नागरिकता संषोधन कानून 2019 के अनुसार केवल तीन देषों के धार्मिक अल्प संख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है। नागरिकता से वंचित ऐसे भारतीयों को किस देष का और किस आधार पर नागरिक मानकर उनकी नागरिकता का फैसला किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है। उनका क्या होगा, जो तीन देषों के धार्मिक अल्प संख्यक नहीं होंगे। असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में डिटेंषन कैम्पों में बंद भारतीय नागरिकों को तत्काल आजाद किया जाय एवं निष्पक्ष और मानवीय मूल्यों के आधार पर फैसला किया जाय। 

 महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अपील किए है ,कि उक्त नागरिकता संषोधन कानून 2019 पर पुनर्विचार करते हुए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 के परिपालन में उक्त नागरिकता संषोधन कानून 2019 को वापस लेने का निर्णय लिया जाय।  उक्त कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश मुस्लिम एजुकेशनल सोसायटी के जिला अध्यक्ष अधिवक्ता उसैद हसन सिद्दीकी ने की है उक्त अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक वरिष्ठ समाजसेवी अशरफ अली अंसारी, रियाज भाई, जम्मू बेग,मो0शमीम,हाजी अब्दुल कादिर,मो0 यूसुफ खान, मो0शाहिद ,मिनहाज खान सदर,सुदामा साकेत, सुदामा कुशवाहा ,लखनलाल साह, राम ब्रिज कुशवाहा,संदीप शाह,अनिल दिवेदी,जेपी शुक्ला, कुंदन पांडेय, जावेद अशरफ, सुरेश शाहवाल, सरफराज अहमद शम्स,शिव शंकर साकेत,रामलल्लू शाह, मो0 आरिफ,शिवनारायण कुशवाहा, मो0 फरहान ,सद्दाम हुसैन एलआईसी,राम गोपाल पाल, प्रह्लाद साह, रामकुमार शाह,कृष्णा शाह,मूल निवासी से नंदकिशोर पटेल एडवोकेट, प्रमोद कुमार नापित एडवोकेट, गंगाप्रसाद साह एडवोकेट, मन्नान खान एडवोकेट ,नसीमुद्दीन सिद्दीकी एडवोकेट, वकील अहमद सिद्दीकी एडवोकेट, सुदामा साकेत अधिवक्ता,अन्नू पटेल,परमेश्वर पटेल, भीम आर्मी से संजय अंबेडकर, निर्भय जयकर, अनिल रावत, रामायण साकेत, चंदन साकेत नाजी संघ से हैमंत कुमार वर्मा,  रतिभान वर्मा, राजेंद्र प्रसाद साकेत, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति से विजय भाई ,जियाउर रहमान सिंगरौली सदर ,रफीउल्लाह बैग ,कमरुद्दीन अंसारी,समसुद्दीन अनसारी,मोनीष खान ,मकसूद रजा,मोहम्मद इलियास खान,सय्यूब बेग,दरूद खान,खुर्शीद अंसारी,कुद्दुस सलमानी,शैलेन्द्र शाह,आदि हजारो लोग लोग उपस्थित रहे।