टंट्या भील बलिदान दिवस : टंट्या भील स्मारक के लिये जबलपुर सेंट्रल जेल से पहुंचेगी मिट्टी

बताया जा रहा है कि जबलपुर से कलश में मिट्टी लेकर उनकी जन्मस्थली पर पहुंचाया जाएगा और वहीं पर उनका एक भव्य स्मारक तैयार हो रहा है। उस स्मारक में पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल किया जाएगा।

जबलपुर, संदीप कुमार। अमर क्रांतिकारी टंट्या भील के व्यक्तित्व और कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई आयोजन आगामी दिनों में आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आज अमर शहीद टंट्या भील का बलिदान दिवस मनाते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल से पवित्र मिट्टी को कलश में रखकर उनकी जन्मस्थली खंडवा ले जाया जाएगा। इस दौरान कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव जबलपुर सांसद राकेश सिंह भी उपस्थित रहेंगे।

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आपको बता दें, अमर शहीद टंट्या भील को जबलपुर के केंद्रीय जेल में 4 दिसंबर अट्ठारह सौ नवासी को फांसी दी गई थी। 12 साल तक अंग्रेजों से लड़ने वाले टंट्या भील जनजाति के सदस्य थे। उनका जन्म 1840 में पूर्वी निमाड़ की पंधाना तहसील में हुआ था।

बताया जा रहा है कि जबलपुर से कलश में मिट्टी लेकर उनकी जन्मस्थली पर पहुंचाया जाएगा और वहीं पर उनका एक भव्य स्मारक तैयार हो रहा है। उस स्मारक में पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल किया जाएगा। बताया जाता है कि अमर शहीद टंट्या भील को धोखे से अंग्रेजो ने गिरफ्तार कर लिया था और इंदौर में ब्रिटिश रेजिडेंसी क्षेत्र में सेंटर इंडिया एजेंसी जेल में रखा गया। बाद में उन्हें जबलपुर जेल लाया गया और 4 दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी दी गई। टंट्या भील का मूल नाम तातिया था। उन्हें प्यार से टंट्या मामा के नाम से बुलाया जाता था। उन्हें भारत का रॉबिनहुड भी कहा जाता है।