संसद के आकार का एक ऐसा मंदिर जिसकी वास्तुकला देखकर आप भी हो जाएंगे दंग!

मुरैना जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। जाने इस मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें-

मुरैना, संजय दीक्षित। श्रावण मास के आखिरी सोमवार को मुरैना (Morena) जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर मितावली गांव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर (Chausath Yogini Temple in Mitawali) के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। बता दें, ये भव्य प्राचीन मंदिर 64 शिवलिंग (Shivlinga) वाला गोलाकार मंदिर है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि भारतीय संसद की इमारत भी इसी मंदिर से प्रेरित की गई है। चौसठ योगिनी मंदिर देश भर में प्रसिद्ध है। मितावली गांव में बना यह मंदिर जमीन से करीब 100 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। दूर से मंदिर को देखा जाए तो यह गोलाकार उड़न तश्तरी की तरह दिखाई देता है।

संसद के आकार का एक ऐसा मंदिर जिसकी वास्तुकला देखकर आप भी हो जाएंगे दंग!

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इस भव्य मंदिर में 64 शिवलिंग के कक्ष बने हुए हैं। वहीं एक कक्ष में बड़ी और एक छोटी शिवलिंग भी रखी हुई है। इसको इकहोत्तरसो महादेव के नाम से भी जाना जाता है। आपको बता दें, इस 64 योगिनी मंदिर का निर्माण 1323 ईस्वी में हुआ था जिसे कच्छप के राजा देवपाल ने बनवाया था। बताया जाता है कि ये मंदिर सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान करने का मुख्य स्थान था। कुछ लोग इसे तंत्र विद्या का बड़ा केंद्र मानते हैं।

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भारत में गोलाकार मंदिरों की संख्या बहुत कम है, यह मंदिर भी उन्हीं में से एक है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सैकड़ों साल पुराना भव्य मंदिर है जहां भूकंप के कई बार झटके भी लगे लेकिन मंदिर में किसी भी चीज़ को अबतक नुकसान नहीं हुआ है। यह मंदिर मुख्य पर्यटन स्थलों में भी शुमार माना गया है।