Accident : ओरछा की जामनी नदी पर बड़ा हादसा, पुल से नीचे गिरी कार, 3 की मौत

मंगलवार शाम को एक ओमनी कार अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी, जिसमें एक ही परिवार के 3 सदस्यों पिता, पुत्री और पुत्र की मौत हो गई। वही माँ की जान बच गई।

ओरछा, मयंक दुबे| ओरछा (Orchha) के जामनी नदी पुल (Jamni River Bridge) पर मंगलवार शाम को एक ओमनी कार अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी, जिसमें एक ही परिवार के 3 सदस्यों पिता, पुत्री और पुत्र की मौत हो गई। वही माँ की जान बच गई। पूरा परिवार पृथ्वीपुर का रहने वाला था और झांसी से इलाज कराकर वापस अपने घर जा रहा था।इसी दौरान यह हादसा हो गया।  यहां पूर्व में इस तरह के हादसे हो चुके हैं। यहां 30 वर्ष पूर्व भी एक बस नदी में जा गिरी थी, उस हादसे में 30 लोगो की मौत हुई थी।

मिली जानकारी के अनुसार, घटना शाम 7 से 8 के बीच की बताई जा रही है। मंगलवार की देर रात ओरछा की जामनी नदी पुल पर एक कार नीचे जा गिरी, जिसमें एक साथ तीन लोगों की मौत हो गई। वही एक महिला की जान बच गई। हादसे में पृथ्वीपुर के एक ही परिवार के 3 सदस्य की मौत ने जिले के लोगों को झकझोर कर रख दिया। इस हृदय विदारक घटना के बारे में जिसकों भी जानकारी लगी उसका ह्रदय रुदन करने से नहीं रह सका।

बताया जा रहा है कि यह पुल कई वर्षों से अपने जीर्णउद्धार की बाठ जोहे है। रात के जिस समय यह हादसा हुआ उस वक्त अंधेरा बहुत था और और प्रशासन के सामने चुनौती थी कि किस तरीके से कार का पता लगाया जाए रेस्क्यू शुरू हुआ ।बावजूद इसके एमपीटी के राफ्टिंग बोट के दो जांबाज राफ्टर गोताखोर पुष्पेंद्र उर्फ झगडू केवट और भवानी केवट एक तरफ ठंड की ठिठुरन के बीच नदी के पानी में उतरे और  पता लगाने की कोशिश कि आखिरकार कार गिरी कहां है।

तकरीबन 5 घंटे के रेस्क्यू के बाद इन गोताखोरों की मदद से कार को नदी के पुल के हिस्से वाले इलाके में ट्रैक कर लिया गया और फिर क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया लेकिन अफसोस की कार में सवार संदीप साहू की कार में ही मौत हो गई थी, वही उसके 5 वर्षीय बेटे कृष्णा का अभी कोई पता नहीं लग सका, बेटी तनु को सबसे पहले ही पुलिस जवानों ने ढूंढ लिया था लेकिन उसकी जान को भी ना बचाया जा सका ।इन जांबाज एमपीटी के कर्मचारियों की मेहनत बेरंग रही बावजूद इसके प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच भी मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग में आउट सोर्स पर लगे यह कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बगैर इन्हें ढूंढने में सफल रहे।

ऐसा पहली बार नहीं है कि इन गोताखोरों के द्वारा किसी की जान को बचाने का प्रयास किया गया हो गाहे-बगाहे यह ऐसे परोपकार के कामों में सबसे आगे होते हैं लेकिन पुरस्कारों की श्रेणी में सबसे पीछे क्योंकि पुरस्कार लेने में तो वह सरकारी मुलाजिम आगे होते हैं जो सिस्टम का हिस्सा होते हैं ।।।

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