एसडीएम, तहसीलदार पर फिर लगा आरोप, बस ऑपरेटर हुए लामबंद

टीकमगढ़।आमिर खान। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के टीकमगढ़ (Tikamgarh) जिले में पदस्थ एसडीएम मनोज प्रजापति और तहसीलदार अनिल तलैया एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इससे पहले भी इनके ऊपर किसान के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा था जिसमें टीकमगढ़ विधायक ने इनके विरुद्ध कार्यवाही की मांग की थी। यह मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि अब एक बार फिर एसडीएम और तहसीलदार पर बस ऑपरेटरों के साथ बदसलूकी व धमकी का आरोप लगा है। मामले को लेकर टीकमगढ़ के बस ऑपरेटर लामबंद हो गए हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर से लिखित रूप में की गई।
पूरा मामला 13 मई की रात का है, जब रेलवे स्टेशन पर श्रमिक ट्रेन मजदूरों को लेकर पहुंची थी। इसी दौरान वहां बसों के जरिए इन मजदूरों को उनके गांव तक भेजा जा रहा था। इस व्यवस्था के लिए टीकमगढ़ कलेक्टर और एसपी सहित पूरे जिले का अमला लगा हुआ था और पूरी सतर्कता के साथ मजदूरों को रेल से उतरवाने के साथ उन्हें बस में बैठाया जा रहा है। यह पूरा कार्य रात्रि 10 बजे तक तो सही ढंग से चलता रहा, लेकिन जैसे वहां रात्रि का समय हुआ और कलेक्टर व एसपी व्यवस्था की जिम्मेवारी एसडीएम और तहसीलदार को सौंपी। इसके ठीक बाद मजदूरों को बसों में जानवरों की तरह भरा गया। यह सब देख बस स्टाफ ने बसों को ले जाने से इंकार कर दिया। मामला तूल पकड़ा और तत्काल वहां बसों के ऑपरेटरों को बुलाया गया। बस ऑपरेटर मौके पर पहुंचे और उन्होंने भी इसका विरोध किया की 40 सीटर बस में नियम के अनुसार ही सवारियों को बैठाया जाए, यह बात टीकमगढ़ एसडीएम और तहसीलदार को रास नहीं आई उन्होंने बस ऑपरेटरों को लाइसेंस निरस्त की धमकी दी। मामला यहीं नहीं रुका जब जिला बस यूनियन अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने एसडीएम और तहसीलदार की इस बात का विरोध किया, तो उनके खिलाफ एसडीएम ने शासकीय कार्य में बाधा का मामला थाने में दर्ज करा दिया। इसके बाद वहां हंगामे जैसी माहौल व्याप्त हुआ, किन्तु मानवता को देखते हुए बस ऑपरेटरों ने जिला प्रशासन का सहयोग किया और बस स्टाफ से सवारियां के जाने के लिए अनुरोध किया, बस ऑपरेटर बिना पीपीई किट और बिना सेनेटाइजर किए बसों में सवारियों को बैठाकर उनके गंतव्य तक भेजने गए। इस सारे घटनाक्रम की फोटोग्राफी कराकर आज कलेक्टर हर्षिता सिंह को बस ऑपरेटरों ने एक ज्ञापन देकर मामला में एफआईआर निरस्त कराने की मांग के साथ दोषी एसडीएम और तहसीलदार पर कार्यवाही की मांग की। अगर इनके विरूद्ध कार्यवाही नहीं की जाती है, तो बस ऑपरेटरों ने एमपी भर की बसें बंद करने की चेतावनी दी है। फिलहाल इस सारे मामले पर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

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