Mahakal Lok से मालवा-निमाड़ में बढ़ा पर्यटन, अब विकसित होगा टूरिस्ट सर्किट

पर्यटन के लिहाज से उज्जैन पहुंचने वाले लोगों के लिए महाकाल लोक (Mahakal Lok) एक खास जगह बन गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान शिव की बनाई गई अलग-अलग कलाकृतियों को निहारने के लिए पहुंचते हैं।

Mahakal Lok: पर्यटन की दृष्टि से इन दिनों मध्य प्रदेश (MP) पर्यटकों का पसंदीदा स्थान बन चुका है। मध्य प्रदेश टूरिज्म (MP Tourism) के लिए आने वाले लोगों को इस समय सबसे ज्यादा जो जगह आकर्षित कर रही है वह उज्जैन (Ujjain) के महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar mandir) में बनाया गया महाकाल लोक है। यहां पर भगवान शिव के अलग-अलग रूप और कहानियों पर कई सारी मूर्ति और स्कल्पचर स्थापित किए गए है। जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।

महाकाल लोक की खूबसूरती ने मालवा-निमाड़ में पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा कर दिया है। ज्यादा से ज्यादा सैलानी मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ की ओर आकर्षित हो रहे हैं और इसी को देखते हुए उज्जैन, इंदौर, हनुवंतिया, झाबुआ, मांडू और ओंकारेश्वर जैसी जगहों को टूरिस्ट सर्किट के रूप में विकसित करने की कोशिश पर्यटन विभाग की ओर से की जा रही है। आने वाले समय में इन सभी जगहों पर पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी की जाएगी ताकि उज्जैन आने वाले पर्यटक इन जगहों पर भी घूमने फिरने के लिए जा सके।

उज्जैन में विराजित महाकालेश्वर की तरह ही ओंकारेश्वर भी द्वादश ज्योतिर्लिंग में शामिल है। नर्मदा नदी के किनारे बसे भोलेनाथ की आराधना के लिए देश-विदेश से कई पर्यटक यहां पर पहुंचते हैं। इसी तरह महेश्वर और इंदौर भी पुरातन संस्कृति से जुड़े हुए शहर है। मांडू नर्मदा नदी के किनारे पर ही बसा हुआ है और इसे रानी रूपमती और मुगल शासक बाज बहादुर के प्रेम के लिए जाना जाता है। जितने भी पर्यटक मध्य प्रदेश पहुंचते हैं वह इन जगहों घूमने जाना चाहते हैं।

उज्जैन में बढ़ा पर्यटन

महाकालेश्वर मंदिर के विस्तारीकरण की योजना में तैयार किए गए महाकाल लोक का जबसे लोकार्पण हुआ है। तब से उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। पहले जहां 30 से 35 हजार पर्यटक यहां पहुंचते थे वह आंकड़ा अब 50 हजार पहुंच चुका है। त्योहार के मौके पर तो ये आंकड़ा लाखों तक पहुंच जाता है।

बनेगा टूरिस्ट सर्किट

उज्जैन से ओंकारेश्वर पहुंच मार्ग काफी संकरा है और खराब भी है। इसी के चलते इन दोनों धार्मिक स्थलों के बीच विकसित किए जाने वाले सर्किट पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए लगभग 200 करोड़ रुपए खर्च कर व्यवस्थाएं उपलब्ध करवाई जाने वाली है। इसमें पहुंच मार्ग से लेकर ठहरने की व्यवस्था और खाने पीने की सुविधा शामिल है।