हरसिद्धि मंदिर के दीपस्तंभ प्रज्वलित करने के लिए दिसंबर तक हुई बुकिंग, 2 हजार साल पुरानी है परंपरा

उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर में स्थित दीप स्तंभ प्रज्वलित करने के लिए एडवांस बुकिंग हो गई है।

उज्जैन, डेस्क रिपोर्ट। आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। देशभर के माता मंदिरों में आज से शक्ति की आराधना शुरू कर दी गई है। उज्जैन (Ujjain) में स्थित हरसिद्धि माता (Harsiddhi Mata Mandir) का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर विक्रमादित्य की आराध्य देवी मां हरसिद्धि विराजित है। नवरात्रि में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं और यहां जलने वाली दीप मालिका में दीपक जलवाते हैं।

प्राचीन काल से विराजित इस मंदिर में लगभग 2000 साल पुराने 51 फीट के दो दीपस्तंभ है। इस स्तंभ में लगभग 1011 दीये हैं। इन दीयों को जलाने के लिए देशभर से श्रद्धालु मंदिर समिति से संपर्क करते हैं। इन सभी दीपक को लोग मिलकर 5 मिनट में प्रज्वलित कर देते हैं जिसके बाद मंदिर का पूरा प्रांगण रोशनी से जगमगाता है। इन सभी दीयों को जलाने में लगभग 60 लीटर तेल और 4 किलो रुई का इस्तेमाल किया जाता है।

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मंदिर में स्थापित इन दीपस्तंभ को यहां पर महाराजा विक्रमादित्य ने स्थापित करवाया था। पहले इन्हें नवरात्रि में जलाया जाता था लेकिन अब यह साल भर प्रज्वलित होते हैं। दीप मालिका को सजाने के लिए देशभर से श्रद्धालु एडवांस में बुकिंग करवाते हैं। फिलहाल की स्थिति की अगर बात की जाए तो यहां पर आने वाली 10 दिसंबर तक की तारीख बुक हो चुकी है। इन दीपस्तंभ पर चढ़कर दीपक प्रज्वलित करना आसान काम नहीं है क्योंकि तेल की वजह से ही काफी चिकने हो जाते हैं। इसके बावजूद भी उज्जैन का जोशी परिवार लगातार 100 सालों से दीप मालिका रोशन करता आ रहा है।

रोजाना शाम को जब मंदिर की आरती की जाती है तब 6 लोग इस स्तंभ पर चढ़कर 5 मिनट में 1011 दीपक को प्रज्वलित कर देते हैं। दीया प्रज्वलित होते देखने का यह क्षण बहुत ही आनंददायक होता है और इस समय वहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं।

बता दें कि हरसिद्धि माता शक्ति पीठ की स्थापना तब हुई थी जब माता सती ने अपने पिता द्वारा रखे गए यज्ञ में खुद को हवन कुंड की अग्नि में समर्पित कर दिया था। गुस्से में जब भगवान शिव माता सती का शरीर लेकर पृथ्वी के चक्कर लगा रहे थे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के अंग के 51 टुकड़े किए थे। माता सती के अंग के टुकड़े जहां-जहां गिरे वहां पर शक्तिपीठों की स्थापना हुई और कुल मिलाकर 51 शक्तिपीठों का निर्माण हुआ। उज्जैन में माता सती की कोहनी गिरी थी इसके बाद इस मंदिर का नाम हरसिद्धि रखा गया।