उमरिया: एक जमीन के कितने मालिक? मिलीभगत से मृत व्यक्ति की जमीन पर हेरा-फेरी का मामला उजागर

इल पूरे मामले में पुलिस औक कलेक्टेर को शिकात की गई थी, जिसके बाद मीलीभगत का मामला सामने आया है।

उमरिया, बृजेश श्रीवास्तव। उमरिया जिले में एक मृत व्यक्ति की जमीन की हेरा-फेरी का मामला सामने आया है। इस मामले में मृत व्यक्ति की जमीन पर उसके वारिसदारों, अन्य दलालों और भूमाफियाओं की कब्जे को लेकर शिकायत दर्ज की गई है। यहां पचईया नाम के मृत व्यक्ति की कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है।

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इस मामले में कभी मृत व्यक्ति पर एफआईआर कर दी जाती है तो कहीं मृतक को उपस्थित कर रजिस्टार कार्यालय में रजिस्ट्री करा दी जाती है। मामले में एक तरफ बिना सोचे समझे मृत के वारिसों ने भूमि की रजिस्ट्री करा दी और दूसरी तरफ बिना किसी डर के भूमि के नये मालिक ने भी किसी दूसरे को जमीन देकर रजिस्ट्री करा डाली। वहीं इस मामले को लेकर वारिसों ने भरौली चौकी और कलेक्टर में शिकायत की है। जानकारों का कहना है कि दूसरी बार उपजे मृत पचंईया के मामले में दलालों को पहले भी मुंह की खानी पड़ी थी और इस बार भी दलालों का तगड़ा दखल माना जा रहा है। गौरतलब है कि सरकारी रिकार्ड में हेरफेर कर जिले से सटे एक बड़े रकबे को बेच दिया गया है।

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इस पूरे मामले को लेकर मृत पचंईया के वारिसदारों का कहना है कि हवाई पट्टी के समीप खसरा क्रमांक 180/2061 पूर्व में इसी जमीन को फर्जी पचंईया (व्यक्ति ) को लाकर रजिस्ट्री करा दी गई थी, जबकि पचंईया की मौत हो चुकी है। वहीं धोखाधड़ी के मामले में इन दलालों को सजा भी भुगतनी पड़ी थी। इस मामले की शिकायत पर पूर्व कलेक्टर ने उक्त भूमि को सरकारी घोषित कर दिया था। जिसके बाद पचंईया के वारिसदारों ने न्यायालय का सहारा लेकर अपना वारिसाना हक प्राप्त किया। तभी पैसों के लालच में आकर भरौला निवासी सुरेश चौधरी ने उक्त भूमि की रजिस्ट्री अपनी पत्नि के नाम करा ली और उक्त भूमि अन्य दूसरे व्यक्तियों को बेच डाली। इस पूरे घटना क्रम में सुरेश चौधरी और अन्य दलालों की संदिग्ध भूमिका मानी जा रही है।

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एक तरफ कलेक्टर ने हाल ही में अवैध रुप से कब्जाई भूमियों और सरकारी नियमों से विपरित बनी कालोनियों पर शिकंजा कसते हुए उक्त भूमियों को शासन के अधिपत्य में करा दिया है, वहीं दूसरी ओर कागजी हेरफेर और इस तरह की धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं जिससे कहीं न कहीं सरकारी जिम्मेदारों पर सैकड़ो सवाल उठ रहे हैं। एक बार फिर मृत व्यक्ति की जमीन पर दलालों, भूमाफियाओं और सरकार की हेर-फेर से पीड़ित वारिसदारों को परेशान होना पड़ रहा है।