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पीएम आवास की आस में भटकते पात्र ग्रामीण-आदिवासी परिवार, नहीं मिल रहा न्याय

Written by:Amit Sengar
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पीड़िता ने थक हार कर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है, हद तो तब हो गई जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर भी चंदिया पुलिस के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। हालांकि अब मीडिया के हस्तक्षेप के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने जांच कर एफआईआर दर्ज कराने आश्वस्त किया है।
पीएम आवास की आस में भटकते पात्र ग्रामीण-आदिवासी परिवार, नहीं मिल रहा न्याय

Umaria News : सरकार भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना चला रही हो लेकिन आज भी कई गरीब ऐसे हैं जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से सामने आ रहा है जहाँ एक आदिवासी बेटी को प्रधानमंत्री आवास नहीं मिला है, कड़ी मशक्कत के बाद उसके नाम पर आवास तो आया लेकिन अब सरपंच-सचिव की दबंगई ने उसे आवास से वंचित कर दिया, इस बात को लेकर आदिवासी महिला जिला प्रशासन के नुमाइंदों के पास पहुंची तो उसे वहां से भी भगा दिया गया यहां तक कि उसके साथ छेड़छाड़ जैसी हरकत करके मारपीट की गई। जिस बात को लेकर महिला अब अपने ऊपर हुए अन्याय को बताने सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। ऐसे में कैसे बेटी पढ़ेगी और आगे बढ़ेगी।

मामला उमरिया जिले के चंदिया थाना क्षेत्र के ग्राम देवरा का है जहां पर एक बार फिर एक शिक्षित आदिवासी युवती को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि पाने के लिए उसे छेड़छाड़ और मारपीट तक सहन करनी पड़ी, आदिवासी होना शायद उसके लिए पाप हो गया हो, महिला का नाम सर्वे सूची में आया, मगर सरपंच और सचिव को सुविधा शुल्क ना मिलने के कारण उस युवती को आवास से वंचित करने की योजना बना ली गई और उस युवती के साथ अभद्रता कर उसे डराया धमकाया गया उसके साथ मारपीट की गई और जब वह इस शिकायत को लेकर थाने पहुंची तो वहां भी उसे न्याय के बदले जातिगत अपमान सहन करना पड़ा।

पीड़िता ने थक हार कर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई है, हद तो तब हो गई जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के कहने पर भी चंदिया पुलिस के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। हालांकि अब मीडिया के हस्तक्षेप के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने जांच कर एफआईआर दर्ज कराने आश्वस्त किया है।

उमरिया से ब्रजेश श्रीवास्तव की रिपोर्ट

Amit Sengar
लेखक के बारे में
मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।” View all posts by Amit Sengar
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