कोविड से अनाथ हुए बच्चों का पैसा नही दे रहा SAHARA… सीएम को दिया पत्र

विदिशा, डेस्क रिपोर्ट। कोविड में अनाथ हुए बच्चों तक का पैसा सहारा कंपनी ने हजम कर लिया, विदिशा के निकट जीवाजीपुर के रहने वाले एक बेहद गरीब परिवार ने 2004 से पाई-पाई जोड़कर सहारा पैराबैंक की fd स्कीम में जमा कराई, 2018 में यह एफडी पूरी हो गई लेकिन कंपनी ने पैसा देने की बजाए तारीखों पर तारीखे देना शुरू कर दिया, और इसी दौरान इस परिवार में पति-पत्नी दोनों कोरोना संक्रमण से मौत के मुहँ में समा गए, इस दौरान भी परिजन सहारा पैराबैंकिंग के अधिकारियों के चक्कर काटते रहे मगर पैसा नही मिला और कहा गया कि उनकी एफडी अन्य स्कीम में डाइवर्ट कर दिया, इसके बाद भी इस गरीब परिवार के यह अनाथ 4 मासूम सहारा के विदिशा और भोपाल आफिस के चक्कर लगाकर गुहार लगाते रहे कि एफडी का पैसा उन्हें दे दिया जाए, मगर सहारा पैराबैंकिंग के अधिकारियों ने इन अनाथ बच्चों की याचना को दरकिनार कर दिया, और वही बात दोहराते रहे कि पैसा अन्य स्कीम में लगा दिया गया। अनाथ बच्चों के आंसू और मजबूरी देखकर भी सहारा पैराबैंकिंग के कर्मचारियों या अधिकारियों का दिल नही पसीजा, इस परिवार के पास न तो रहने के लिए घर है और न ही जमीन, गरीबी के चलते इस परिवार की जो भी जमापूंजी थी वो माता-पिता के इलाज में लग गई।

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कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में कोविड के दौरान माता-पिता को खो चुके अनाथ बच्चों को सी एम हाउस बुलाया था यहां सी एम ने इन बच्चों के सिर पर हाथ रखकर उन्हें भरोसा दिलाया था कि शिवराज के रूप में उनके मामा उनकी परवरिश करेगे, यह मासूम अनाथ बच्चे भी सी एम हाउस पहुंचे, वहां उन्होंने पत्र लिखकर मामा से गुहार लगाई कि सहारा पैराबैंकिंग में जमा उनकी एफडी की राशि उन्हें दिलवाई जाए, इस परिवार के यह चार बच्चे नाबालिग़ है। इन्हें उम्मीद है कि मामा रूपी सी एम से लगाई गई उनकी गुहार जरूर सुनेंगे।

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वही इस मामलें ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सहारा पैराबैंकिंग में जिन लाखों लोगों ने भरोसा जताते हुए पैसा जमा किया था कंपनी ने उस पैसे को डकार लिया और अब अधिकारीयों और कंपनी के संचालक की इन मजबूर और दर्द से भरे इन लोगों के प्रति संवेदना तक मर चुकी है।