Vidisha News: BJP विधायक के नेतृत्व में पुलिस के लिए की गई अपशब्द भरी नारेबाजी

विधायक जी ने सीधा आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि संतराम पहले से ही इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासन को कर चुका था और उमर से अपनी जान को खतरा ही बता चुका था।

विदिशा, डेस्क रिपोर्ट। विदिशा (vidisha) जिले के सिरोंज से भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा (umakant sharma) के नेतृत्व में एकत्र हुई भीड़ ने बेहद अपमानजनक और अपशब्द भरी नारेबाजी पुलिस के लिए की। हैरत की बात यह है कि विधायक जी चुपचाप न केवल नारेबाजी सुनते रहे बल्कि भीड़ को भी प्रोत्साहित करते रहे। मामला विदिशा जिले के मुरवास का है।दो दिन पहले यहां पर संतराम नामक दलित नेता की कुछ हमलावरों ने हत्या कर दी थी।

दरअसल विवाद वन विभाग की भूमि पर उमर नामक व्यक्ति द्वारा किये गये अतिक्रमण से जुड़ा हुआ था जिसका विरोध संतराम ने किया था। उमर के नेतृत्व में आए थे लोगों ने संतराम की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी। इस पूरे मामले के चलते पूरे कस्बे में हंगामा हो गया और भीड़ एकत्र हो गई। फिर क्या था विधायक जी भी तत्काल पहुंच गए और भीड़ को लेकर बैठ गए धरने पर। विधायक जी ने सीधा आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध है क्योंकि संतराम पहले से ही इस पूरे मामले की शिकायत प्रशासन को कर चुका था और उमर से अपनी जान को खतरा ही बता चुका था।

Read More:  MP School: 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए शासकीय स्कूल ने की बड़ी व्यवस्था, आदेश जारी

उसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। विधायक जी ने तो यहां तक कह दिया कि इस मामले की जानकारी एसडीएम, एसडीओपी और एसपी को नहीं थी जबकि उनके पास थी। इससे साफ है कि स्थानीय थाने मुरवास की पुलिस आरोपी से मिली थी और वहां का थानेदार आरोपी को अपने साथ गाड़ी में बिठा कर ले गया।जबकि संतराम तड़पता रहा।

उमाकांत शर्मा ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और साफ तौर पर कहा है कि यदि यह मांगे पूरी नहीं हुई तो वह सीधे मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से बात करेंगे। यहां तक तो सब ठीक था लेकिन भीड़ के ने जिस तरह से अपमानजनक और अभद्र भाषा में पुलिस के लिए नारेबाजी की और विधायक जी चुपचाप बजाय लोगों को रोकने के यह सब सुनते रहे, वह बेहद आपत्तिजनक था। हो सकता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में किसी एक व्यक्ति ने लापरवाही बरती हो लेकिन उसके लिए पूरे महकमे को इस तरह से सार्वजनिक तौर पर जलील करना कतई उचित नहीं कहा जा सकता।