विकास के आभाव में डूबा गांव, यहां घुटनों तक पानी में होकर गुजरती है शव यात्रा,15 वर्षों से ग्रामीण लगा रहे गुहार

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन नाले के पास सड़क बना कर दे या श्मशान के लिये अन्य जगह भूमि आवंटन कर दे।

नीमच, कमलेश सारडा। नीमच में जहां एक ओर जहां प्रशासन विकास की बड़ी-बड़ी बातें करता है, वहीं दूसरी ओर जिले में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। नीमच जिले के लसूड़िया ग्राम पंचायत के बड़ोदिया गाँव से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। यहां ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें गांव में किसी के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिये गहरा नाला पार करके जाना पड़ता है। और यदि ज्यादा बारिश हो जाए तो नाला भरने के वजह से उन्हें निजी भूमि पर ही शव का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। वहीं इस मामले पर ग्रामीण पिछले 15 वर्षों से शासन-प्रशासन और आला अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की है, लेकिन अब तक समस्या का कोई समाधान नहीं किया गया है।

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दरअसल बड़ोदिया गांव में लोगों की शिकायत है कि किसी भी शव को अंतिम संस्कार के लिये मुक्ति धाम तक ले जाने के लिए एक लम्बा नाला पार करना पड़ता है, जिससे गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। गांववालों का कहना है कि गांव में किसी का निधन हो जाये और नाले में बारिश का पानी भरा हो तो फिर अंतिम संस्कार निजी भूमि पर करना पड़ता है। और यदि किसी के पास निजी भूमि नहीं है तो बारिश रुकने या नाले में पानी कम होने तक कि प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

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ऐसा ही एक ताज़ा मामला सामने आया जहां गाँव मे बीते दिन एक मौत हो गई जिनकी अंतिम यात्रा भी नाले के पानी मे होकर दुर्गम रास्ते से निकाली गई जिस रास्ते की समस्या के लिए गांव वाले 15 साल से शासन-प्रशासन से गुहार लगा रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार 15 वर्षों से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते आ रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन नाले के पास सड़क बना कर दे या श्मशान के लिये अन्य जगह भूमि आवंटन कर दे। वहीं इसी मामले में कलेक्टर मयंक अग्रवाल का कहना है कि यदि पंचायत स्तर का काम होगा तो वहीं से करवाया जाएगा और अगर बड़ा स्टूमेंट बनेगा तो शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। इस समस्या पर जल्द ही समाधान किया जाएगा।